बिहार

राज्यपाल के नाम भूमि पंजीकरण का अर्थ सरकार को स्वामित्व सौंपना, मस्जिद-मदरसा की जमीन पर जल्दबाजी न करें : इमारत ए शरिया

पटना, अजित। इमारत ए शरिया के नाज़िम मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद सईद-उर-रहमान क़स्मी ने मुसलमानों से अपील की है कि मस्जिदों, मदरसों, ईदगाहों और कब्रिस्तानों की जमीन को राज्यपाल के नाम पंजीकृत कराने के संबंध में किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के नाम भूमि का पंजीकरण कराना व्यावहारिक रूप से उस भूमि के स्वामित्व को सरकार को हस्तांतरित करने के समान है।

नाज़िम ने कहा कि कुछ इलाकों से यह सूचना मिल रही है कि लोग यह सोचकर धार्मिक स्थलों की जमीन राज्यपाल के नाम दर्ज कराने की पहल कर रहे हैं कि इससे संपत्तियां सुरक्षित रहेंगी, जबकि यह धारणा सही नहीं है. राज्यपाल के नाम पंजीकृत जमीन पर सभी अधिकार सरकार के पास चले जाते हैं और भविष्य में इससे गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में यह कदम न तो धार्मिक दृष्टि से उचित है और न ही इससे निजी या दान में दी गई जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. मस्जिदें, मदरसे, ईदगाह और कब्रिस्तान सामुदायिक धार्मिक संपत्तियां हैं और उनका संरक्षण व प्रबंधन स्वयं मुसलमानों की जिम्मेदारी है।

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नाज़िम ने सलाह दी कि ऐसी जमीनों के दस्तावेजों को कानूनी रूप से मजबूत किया जाए और उनके संचालन के लिए शरिया के अनुसार एक ट्रस्ट या प्रशासनिक समिति का गठन किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि अमीर-ए-शरिया मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी इस पूरे मसले को लेकर गंभीर हैं और बंदोबस्ती के पंजीकरण, अपंजीकृत भूमि की सुरक्षा तथा बिना कागजात वाली जमीनों पर कानूनी और शरिया पहलुओं से विचार किया जा रहा है।

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