फुलवारी शरीफ, अजीत : फुलवारी सुरक्षित विधानसभा सीट पर इस बार मुख्य मुकाबला महागठबंधन समर्थित सीपीआई-एमएल प्रत्याशी गोपाल रविदास और एनडीए की ओर से जेडीयू उम्मीदवार श्याम रजक के बीच माना जा रहा है. यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है और यहां दलित, यादव तथा मुस्लिम मतदाता नतीजे तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2020 के चुनाव में गोपाल रविदास ने जेडीयू उम्मीदवार अरुण मांझी को 13,857 वोटों के अंतर से हराया था. पिछले चुनाव में अरुण मांझी एनडीए प्रत्याशी थे, लेकिन इस बार जेडीयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया और उन्हें मसौढ़ी विधानसभा से उतारा गया. पार्टी ने फुलवारी से सात बार के पूर्व विधायक श्याम रजक को मैदान में उतारा है, जो इस बार आठवीं बार विधानसभा पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
इस सीट पर कुल 3 लाख 51 हजार मतदाता हैं, जिनके बीच 12 प्रत्याशी चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं. दलित समाज में पासवान और रविदास मतदाताओं का बड़ा आधार है, जबकि यादव और मुस्लिम समाज भी निर्णायक स्थिति में है. मतदान के बाद यह तय होगा कि क्या फुलवारी एक बार फिर वाम दल को मौका देती है या जेडीयू के श्याम रजक पुराने प्रभाव को दोबारा स्थापित कर पाते हैं।
चुनाव मैदान में उतरे 12 उम्मीदवारों में
श्याम रजक (जेडीयू-एनडीए).
गोपाल रविदास (सीपीआई-एमएल-महागठबंधन).
अरुण कुमार रजक (आप).
महेश पासवान.
अनिल दास.( निर्दलीय)
युवराज कुमार.( निर्दलीय)
सुकेश कुमार.( निर्दलीय)
पूजा कुमारी.(निर्दलीय)
शशिकांत प्रसाद (जन सुराज).
श्री राज पासवान (प्रबल भारत पार्टी).
सुनील पासवान (राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी).
मुकेश कुमार..
