बिहार

नीतीश के नाम पर जनता का समर्थन, नीतीश के काम से जनविश्वास

फुलवारीशरीफ, अजीत यादव।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजनाओं और उनके नेतृत्व में बिहार में हुए बदलावों को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए रविवार को फुलवारी विधानसभा क्षेत्र के बेऊर स्थित गंगा विहार कॉलोनी में “नीतीश के काम, नीतीश के नाम” शीर्षक से एक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया. इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक अरुण मांझी ने भाग लिया और जनसमूह को संबोधित करते हुए नीतीश सरकार की नीतियों को गरीबों, महिलाओं और युवाओं के हित में बताया।

अरुण मांझी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक सुरक्षा को लेकर जो कदम उठाए हैं, वे बिहार के सबसे कमजोर तबकों के लिए उम्मीद की नई किरण हैं. वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1000 प्रतिमाह कर देना और जल्द ही उसे ₹1100 करने का संकल्प एक ऐतिहासिक निर्णय है, जो संवेदनशील शासन की मिसाल है.कार्यक्रम के अंत में अरुण मांझी ने जनता से अपील की कि वे इन योजनाओं का लाभ सिर्फ खुद तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें घर-घर तक पहुँचाने में सरकार का सहयोग करें और नीतीश सरकार के हाथों को मज़बूती दें।

उन्होंने कहा कि यह अभियान सिर्फ नारेबाज़ी का नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के बीते दो दशकों में किए गए ठोस कार्यों को सामने लाने का एक ज़रिया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार हुआ है. मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, बालिकाओं की साइकिल योजना, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और कुशल युवा कार्यक्रम जैसे कदमों ने राज्य के सामाजिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाया है।

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पूर्व विधायक मांझी ने कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता एक बार फिर नीतीश कुमार को मौका दे, ताकि विकास की यह गति और तेज़ हो सके. उन्होंने कहा कि “हर घर नल का जल” और “हर घर शौचालय” जैसी योजनाओं ने ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन को संभव किया है और सरकार की जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को साबित किया है।

इस जनजागरण अभियान में सैकड़ों लोग शामिल हुए. मंच पर मौजूद प्रमुख चेहरों में सुमित कुशवाहा, सतीश सिंह, सोनू कुमार, छोटू सिंह, भवानी सिंह, बालेन्द्र शर्मा, नवीन बाबू, ओमप्रकाश सिंह, हेमंत कुमार सिंह, मनोज कुमार, जयशंकर प्रसाद, रामानुज सिंह, शक्ति प्रकाश, अरुण कुमार (वकील), विशाल कुमार सिंह, राकेश कुमार, शंभू शर्मा, सतनारायण सिंह और बेलचा सिंह जैसे सामाजिक प्रतिनिधि शामिल रहे।

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