बिहार

400 बच्चे नामांकित, विद्यालय में उपस्थिति नदारद, शिक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल

अररिया, रंजीत ठाकुर। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के विभागीय दावों के बीच भंगही माध्यमिक विद्यालय की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। विद्यालय में करीब 400 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति बेहद कम रहने से पठन-पाठन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि विद्यालय में आठ शिक्षक पदस्थापित हैं, इसके बावजूद बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक सहित कुल आठ शिक्षक पदस्थापित हैं। इनमें एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं, जबकि कंप्यूटर शिक्षक निशांत नीरज वर्षों से बीआरसी नरपतगंज में प्रतिनियुक्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना लाजिमी है।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक संतोष कुमार राय ने बताया कि बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए शिक्षकों द्वारा लगातार अभिभावकों से संपर्क किया जाता है। शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है।

मामला सामने आने पर बीडीओ ने दिखाई सख्ती

मामले को लेकर नरपतगंज प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी कलश कुमार से मोबाइल पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन घंटी बजने के बावजूद बात नहीं हो सकी। वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी अजित कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि विद्यालय की स्थिति की जानकारी मिली है। अपने स्तर से इसकी जांच कराई जाएगी। बीआरसी में वर्षों से प्रतिनियुक्त शिक्षक की प्रतिनियुक्ति समाप्त कराने और उचित कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षण कार्य में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

अब सवाल यह है कि 400 बच्चों के नामांकन के बावजूद विद्यालय में उपस्थिति इतनी कम क्यों है? क्या बच्चों की अनुपस्थिति के कारणों की कभी गंभीरता से समीक्षा हुई? वर्षों से बीआरसी में प्रतिनियुक्त शिक्षक की वापसी को लेकर अब तक पहल क्यों नहीं हुई? बीडीओ के सख्त रुख के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। जरूरत है कि केवल कागजी निर्देशों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि विद्यालय की नियमित जांच, बच्चों की उपस्थिति की निगरानी और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई सुनिश्चित कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए।

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