पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में बनकर तैयार 135 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के रूप में उत्क्रमित कर दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मिलेंगी बेहतर इलाज की सुविधाएं-
इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने घर के नजदीक ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के इलाज के लिए 30 बेड की व्यवस्था होगी। साथ ही, आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता को भी मजबूत किया जाएगा।
हड्डी, आंख, नाक, कान और गले के विशेषज्ञ डॉक्टर होंगे उपलब्ध-
राज्य सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत इन सभी 135 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक केंद्र पर हड्डी रोग, नेत्र रोग तथा नाक, कान और गला (ईएनटी) रोग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित किए गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
प्रत्येक केंद्र के लिए 47 पद निर्धारित-
इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के बेहतर संचालन के लिए प्रत्येक संस्थान में 24 प्रकार के कुल 47 पद निर्धारित किए गए हैं। इनमें उपाधीक्षक, विशेषज्ञ चिकित्सक, सामान्य चिकित्सक, जीएनएम नर्स, सीनियर फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अन्य पद शामिल हैं। इसके अलावा, पहले से सृजित डेंटल हाइजीनिस्ट और ड्रेसर के एक-एक पद भी शामिल रहेंगे।
राज्य के सभी 38 जिलों को मिलेगा लाभ-
इस योजना में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भोजपुर, गोपालगंज, कटिहार, मधुबनी, समस्तीपुर और वैशाली सहित राज्य के सभी 38 जिलों के विभिन्न प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।
ग्रामीण मरीजों को बड़े शहरों में जाने से मिलेगी राहत-
इन स्वास्थ्य केंद्रों के विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज की सुविधाओं का विस्तार होगा। मरीजों को सामान्य बीमारियों के साथ-साथ हड्डी, आंख और ईएनटी से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकेंगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पतालों या बड़े शहरों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही, जिला अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होने की उम्मीद है।
