बिहार

बेहतर स्वास्थ्य देखभाल से मां व बच्चे की हर तरह की जटिलता से बचाव संभव

अररिया, रंजीत ठाकुर। मातृ मृत्यु प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में से एक है. इसके कारणों के प्रति जागरूक होकर काफी हद इसकी रोकथाम व उपचार संभव है. जिले में मातृ स्वास्थ्य व पोषण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय उन्मुखीकरण सह समीक्षात्मक कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया. समाहरणालय परिसर स्थित डीआरडीए सभागार में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह, डीपीएम संतोष कुमार, पिरामल स्वास्थ्य के डीएल संजय कुमार झा, डीएमएनई पंकज कुमार, जिला पोषण समन्वयक कुणाल श्रीवास्तव सहित उपस्थित अन्य अधिकारियों ने सामूहिक रूप से किया. स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में मातृ स्वास्थ्य व पोषण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन की रणनीति पर विचार किया गया.

स्वस्थ मां ही दे सकती है स्वस्थ बच्चे को जन्म –


सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है. सुरक्षित मातृत्व के लिये प्रसव पूर्व, प्रसव के दौरान व प्रसव के बाद कई सप्ताह तक विशेष देखभाल की जरूरत होती है. इस दौरान उन्हें बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत होती है. इससे मां व बच्चे को हर तरह की जटिलता से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पोषण स्वास्थ्य व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. बेहतर पोषण मां व बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली, सुरक्षित गर्भावस्था व प्रसव के साथ-साथ गैर संचारी रोगों से जुड़ी जोखिम को कम करता है. प्रसव के दौरान व इसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक रक्तचाप, असुरक्षित गर्भपात व प्रसव मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है. समय रहते इसका कुशल प्रबंधन जरूरी है.

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी बनाने का प्रयास जारी-

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जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर निरंतर जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं. उचित पोषण का अभाव हर रूप में मानव स्वाथ्य को प्रभावित करता है .मातृ-स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने, इसका क्रियान्वयन, निगरानी व पर्यवेक्षण के लिये जिला व प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमताओं का संवर्द्धन कार्यशाला का उद्देश्य है. ताकि अत्यधिक जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं व दूरदराज के इलाकों में भी सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा दिया जा सके. उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे बेहतर सीखते हैं. पर्याप्त पोषण वाले लोग अधिक उत्पादक होते हैं.

उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की हो रही पहल –


पिरामल स्वास्थ्य के डीएल संजय कुमार झा ने कहा कि संस्थागत प्रसव मामलों में सुधार की दिशा में हाल के दिनों में जिले ने उल्लेखनीय तरक्की है. अब प्रसव पूर्व व प्रसव के दौरान देखभाल की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित कराने की दिशा में पहल जारी है. ताकि प्रत्येक महिला सुरक्षित हाथों से सम्मान व गरिमा के साथ स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके. कार्यक्रम में सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सभी सीडीपीओ, बीएचएम, बीसीएम सहित संबंधित अन्य अधिकारी मौजूद थे.

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