बिहार

न्यूक्लियर मेडिसिन एम्स पटना राजकीय महिला महाविद्यालय में चलाया थायरॉइड जागरुकता अभियान

फुलवारीशरीफ(अजीत यादव): दानापुर के राजकीय महिला महाविद्यालय में सोमवार को पटना हेल्थकेयर न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग ने थायराइड जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत रहने का आग्रह किया.

इस मौके पर नर्सिंग महाविद्यालय, एम्स पटना के छात्राओं के नुक्कड़ नाटक द्वारा लोगों को थायरॉइड के लक्षणों, पहचान और उपचार के बारे में बताया गया.इस दौरान डॉक्टरों ने विशेष तौर से लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि अगर लगातार गले में दर्द सूजन बुखार और सर्दी खांसी हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं.

गौरतलब हो की एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) जी. के. पाल के नेतृत्व में पूरे जनवरी माह में थायरॉइड जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है तथा 2 जनवरी को वाकेथान और परसा गाँव में जागरुकता शिविर का भी आयोजन हुआ.

नाभिकीय विभाग एम्स पटना के विभागाध्यक्ष व थायरॉइड क्लिनीक के इंचार्ज डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि जब थायरॉइड जरूरत से अधिक या कम मात्रा में थायरॉइड हार्मोन्स बनाने लगती है तो इसमें विकार आना माना जाता है (थायरॉइड डिसआर्डर) और फिर उसके अनुरुप इलाज की आवश्यकता होती है।

ये विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं . हाइपोथायरॉइडिज्म के प्रमुख लक्षणो में वजन बढ़ना, जल्द थकान का महसूस होना, मासिक पिरियड में अनियमितता और बदलाव, यौन उतेजना में कमी होना, ज्यादा ठंड लगने का एहसास, गले में सूजन आना, कमजोरी और शरीर में दर्द आदि हैं।

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हाइपोथायरॉइडिज्म के प्रमुख लक्षणो में हृदय की धड़कनों में बदलाव व तेजी, घबड़ाहट, चिंता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, हाथ व ऊंगलीयों में कंपन, अत्यधिक पसीने आना, हथेली में ज्यादा पसीना आना, बार-बार मल त्यागने की आवश्यकता पड़ना, अत्यधिक थकान, कमजोरी, बालों का पतला होना, झड़ना, अचानक वजन कम होना, गले में सूजन आना आदि हैं. ग्रेब्स डिजीज में आँखे प्रायः लाल और बाहर की तरफ निकल जाती है।

किसी भी महिला के माँ नहीं बन पाने का एक प्रमुख कारण थायरॉइड से संबंधित गड़बड़ी हो सकती है। उचित उपचार के बाद प्रजनन तंत्र संबंधी समस्याओं को नियंत्रित्र किया जा सकता है. बच्चों में जन्मजात (कन्जेनाइटल ) हाइपोथायराइडिज्म और इक्टोपिक थायरॉइड की समस्या भी देखी जाती है. बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है।

नाभिकीय चिकित्सा में थायरॉइड स्कैन द्वारा सटिक जाँच की जाती है जो समुचित इलाज में मददगार साबित होती है.डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि बचपन में मिले रेडिएसन इक्सपोजर और परिवार में किसी अन्य को थायरॉइड कैंसर की बीमारी, इसके जोखिमों को और बढ़ाती है

थायरॉइड कैंसर की पुष्टि होने पर ऑपरेशन कर निकाल दिया जाता है और उसके बाद न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में रेडियोसकिय आयोडिन की दवा दी जाती है . तत्पश्चात् उम्र भर न्यूक्लियर मेडिसिन फिजिसियन या इंडोकानोलोजिस्ट की देखरेख में थायरॉइड हार्मोन सप्रेसेन्ट थैरेपी दी जा जाती है।

कार्यक्रम में महाविद्याय की प्राचार्य डॉ. ऊषा विद्यार्थी तथा अन्य अध्यापकगण • एम. एस. एस. ओ. नितिन तथा विभाग के सहयोगी अरविन्द गुप्ता, विकास कुमार, पवन कुमार भास्कर, सिस्टर पुजा कुमारी व विजेन्द्र आदि मौजूद रहे।

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