फुलवारीशरीफ, अजित। पितृ दिवस के अवसर पर यूनिसेफ के स्थायी सहयोगी सदस्य एवं मिशन नौनिहाल सम्मान के संस्थापक-संरक्षक 98 वर्षीय सुखदेव बाबू ने बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिनों को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए पिता की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। संपतचक निवासी सुखदेव बाबू ने यूनिसेफ द्वारा जारी संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिन उसके भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में माता के साथ-साथ पिता की सक्रिय सहभागिता भी बच्चे के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पितृ दिवस के अवसर पर यूनिसेफ की ओर से संचालित “आरंभ” कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम परिवारों को बच्चों के साथ संवाद करने, खेल खेलने, कहानी सुनाने और गुणवत्तापूर्ण समय बिताने के लिए प्रेरित कर रहा है।
सुखदेव बाबू ने कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि पिता केवल जैविक संबंध का नाम नहीं है, बल्कि यह दायित्व, संस्कार और धर्म का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति किसी बच्चे को स्नेह, संरक्षण, मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करता है, वह भी पिता की भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि समाज में अनेक लोग ऐसे हैं जो अपने परिवार से बाहर के बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। सुखदेव बाबू ने कहा कि “आरंभ” कार्यक्रम का संदेश केवल परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में मिला प्यार, संवाद और सहयोग उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने पितृ दिवस के अवसर पर सभी पिताओं तथा बच्चों के जीवन को संवारने वाले लोगों को शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने बच्चों के साथ अधिक समय बिताने और उनके सर्वांगीण विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
