फुलवारीशरीफ, अजित। फुलवारी शरीफ की सरजमीं पर कदम रखने वाले पहले सूफी संत हज़रत मखदूम मिन्हाजुद्दीन रास्ती रहमतुल्लाह अलैह का 660वां सालाना उर्स मुबारक बुधवार को टमटम पड़ाव स्थित मजार शरीफ पर अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ. उर्स के मौके पर सुबह से ही दूर-दराज के इलाकों से हजारों की संख्या में अकीदतमंद मजार शरीफ पर हाजिरी देने पहुंचे. मजार परिसर और आसपास का इलाका देर रात तक जायरीन और श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। उर्स के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादरपोशी की और मुल्क, प्रदेश तथा समाज में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की की दुआ मांगी. कई अकीदतमंद हाथ उठाकर अपने गुनाहों की माफी मांगते नजर आए तो कई लोगों ने अपनी मुरादों की पूर्ति के लिए दुआ की. मान्यता है कि हज़रत मखदूम मिन्हाजुद्दीन रास्ती रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर सच्चे दिल से मांगी गई दुआ कबूल होती है।
उर्स की शुरुआत सुबह मजार शरीफ की गुस्ल की रस्म से हुई. इसके बाद कुरआन ख्वानी का आयोजन किया गया. शाम में खानकाह मुजीबिया के सज्जादानशीन सैयद शाह मौलाना आयतुल्लाह कादरी ने मजार पर फातिहा पढ़ी और देश व प्रदेश में अमन-चैन तथा खुशहाली की दुआ मांगी. उनके नेतृत्व में कुल शरीफ और फातिहा की रस्म अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए. साथ ही विभिन्न इलाकों से हाथी, घोड़ा, बैंड-बाजा और पारंपरिक जुलूस के साथ चादर लेकर श्रद्धालु पहुंचे. नगर भ्रमण के बाद सभी चादर जुलूस मजार शरीफ पहुंचे, जहां चादरपोशी की रस्म अदा की गई. पूरा इलाका सूफियाना रंग में रंगा नजर आया। उर्स मुबारक में स्थानीय विधायक श्याम रजक, नगर परिषद फुलवारी शरीफ के पूर्व चेयरमैन मोहम्मद आफताब आलम सहित राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की. सभी ने मजार पर चादरपोशी कर अमन, भाईचारे और विकास की दुआ मांगी।
विधायक श्याम रजक ने कहा कि हज़रत मिन्हाजुद्दीन रास्ती फिरदौसी जिलानी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर आकर आत्मिक सुकून मिलता है. यहां की रूहानी ताकत लोगों को आपसी प्रेम, सद्भाव और इंसानियत का संदेश देती है. उन्होंने फुलवारी शरीफ, बिहार और पूरे देश की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। चेयरमैन मोहम्मद आफताब आलम ने कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं समाज में मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत का पैगाम देती हैं. उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों के बजाय आपसी एकता और सद्भाव को मजबूत करने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने क्षेत्र की तरक्की और लोगों की खुशहाली की दुआ मांगी। उर्स के अवसर पर मजार परिसर में मेला भी लगा. मेले में मिठाइयों, खिलौनों और अन्य सामानों की दुकानें सजाई गई थीं. बच्चों के लिए झूले और मनोरंजन के विभिन्न साधन भी उपलब्ध रहे. टमटम पड़ाव से लेकर दरगाह शरीफ तक पूरा इलाका आकर्षक रोशनी से जगमगाता रहा। उर्स मुबारक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा. स्थानीय प्रशासन द्वारा पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. सुल्तान रास्ती की देखरेख में सभी धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए।
