बिहार

टीबी उन्मूलन : जिले के आठ प्रखंडों के सीएचओ के लिए कार्यशाला का किया गया आयोजन

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पूर्णिया(न्यूज क्राइम 24): वर्ष 2025 तक यक्ष्मा उन्मूलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्यधिक जोखिम युक्त कठिन क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय में टीबी के लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर उसकी जांच एवं उपचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहनी अतिआवश्यक है। जिसको धरातल पर उतारने को लेकर ज़िले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है।

दूसरे चरण के प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के पूर्णिया पूर्व, बनमनखी, बी कोठी, अमौर, बैसा, भवानीपुर, रुपौली एवं धमदाहा प्रखंडों के आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एएनएम स्कूल के सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया गया। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी, एसीएमओ डॉ आरपी मंडल, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ मिहिरकान्त झा, डीपीसी सुधांशु शेखर, जिला टीबी एचआईवी समन्वयक राजेश शर्मा, डीएओ अमित कुमार, सिफार के धर्मेंद्र रस्तोगी, रीच इंडिया के चंदन श्रीवास्तव एवं जीत कार्यक्रम के अभय श्रीवास्तव के अलावा जिले के सभी वरीय यक्ष्मा पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरीय यक्ष्मा प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस) सहित कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

मलिन बस्तियों में टीबी मरीजों की खोज जरूरी: सिविल सर्जन


सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने बताया कि
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी ख़ोज अभियान के तहत अधिक से अधिक टीबी के लक्षण वाले मरीज़ों की पहचान कर उसका परामर्श, उपचार के अलावा नियमित रूप से दवा खाने को लेकर जागरूक करेंगे। ताकि आगामी 2025 तक के लक्ष्य को शत प्रतिशत पूरा किया जा सके।

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ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक भवन, सार्वजनिक स्थल एवं मलिन बस्तियों से टीबी मरीजों की खोज करनी होगी। अगर किसी व्यक्ति में टीबी बीमारी का लक्षण पाया जाता है तो उनकी स्क्रीनिंग करते हुए बलगम जांच के लिए एकत्रित करने की आवश्यकता है। जिला मुख्यालय स्थित शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, रैन बसेरा, केंद्रीय कारागार, बाल सुधार गृह में माइक्रोप्लान के अनुसार अधिक से अधिक टीबी रोगियों की पहचान विभागीय स्तर पर की जा रही है।

दवा की पूरी खुराक दिलाएगी टीबी से निजात: डॉ मिहिरकान्त झा


जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ मिहिरकान्त झा ने बताया कि दो सप्ताह या उससे ज्यादा दिनों तक होने वाली खांसी मुख्य रूप से टीबी के लक्षण हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए सरकार द्वारा जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच निःशुल्क उपलब्ध है। क्योंकि टीबी बीमारी से संक्रमित पाए गए मरीजों को दवा की पूरी खुराक भी निःशुल्क उपलब्ध करायी जाती है। ताकि उक्त बीमारी को देश से मिटाया जा सके। सबसे अहम बात यह है कि टीबी के लक्षण दिखाई देने के साथ ही सबसे पहले टीबी की जांच कराएं और दवा की पूरी खुराक का सेवन करें। संबंधित सीएचओ अपने-अपने क्षेत्रों की आशा, एएनएम एवं टीबी चैंपियन से मरीज़ों की ख़ोज कराएं। मरीज़ों की पहचान, जांच एवं उपचार होने के बाद ख़ोज करने वाले व्यक्तियों को 500 सौ रुपए विभाग के द्वारा दी जाती है।

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