बिहार

स्वास्थ्य मेला के दौरान हुई टीबी रोगियों की जाँच एवं काउंसिलिंग


पटना(न्यूज क्राइम 24): 16 मार्च- सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर स्वास्थ्य मेला आयोजित किया गया। ताकि सामुदायिक स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. कुमारी गायत्री सिंह ने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर महिलाओं, युवाओं व बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जाँच की जा रही एवं मुफ्त दवाएं भी दी गयीं। इस दौरान सीएचओ के साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा टीबी रोगियों की जाँच, उपचार के साथ उनकी काउंसिलिंग भी की गयी।

समय पर जाँच, दवा सेवन के साथ जागरूकता है जरूरी- डॉ. कुमारी गायत्री सिंह


जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। किन्तु, इस बीमारी से स्थाई निजात के लिए समय पर जाँच और इलाज के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाना जरूरी है। टीबी के लक्षणों की ससमय पहचान कर अविलंब जांच कराया जाना चाहिये| उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर जनप्रतिनिधियों द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने जिलावासियों से अपील की है कि लक्षण दिखते ही तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच कराएं और जाँच के पश्चात चिकित्सा परामर्श के पालन के साथ इलाज कराकर बीमारी से स्थाई निजात पाएं।

हवा से फैलता है टीबी का रोगाणु :

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जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया, टीबी के रोगाणु वायु द्वारा फैलते हैं। जब फेफड़े का यक्ष्मा रोगी खांसता या छींकता है तो लाखों-करोड़ों की संख्या में टीबी के रोगाणु थूक के छोटे कणों (ड्राप्लेट्स) के रूप में वातावरण में फेंकता है। बलगम के छोटे-छोटे कण जब सांस के साथ स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता और वह व्यक्ति टीबी रोग से ग्रसित हो जाता है। चिकित्सा कर्मी की देखरेख में रोगी को अल्पावधि वाली क्षय निरोधक औषधियों के सेवन कराने वाली विधि को डॉट्स (डायरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रिटमेंट शॉर्ट कोर्स) कहते हैं। इसके तहत किया गया इलाज काफी प्रभावी हो जाता है। पूरा कोर्स कर लेने पर यक्ष्मा बीमारी से मरीजों को मुक्ति भी मिल जाती है।


कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने किया सहयोग:


जिले के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर टीबी रोगियों की सुविधा के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर ने सहयोग किया। डॉ सिंह ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के साथ लोगों को टीबी को लेकर मनोवैज्ञानिक, सहयोग भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) पर बड़ी जिम्मेवारी है कि वह केंद्र पर आ रहे लोगों को बेहतर ढंग से टीबी की जांच और इलाज के साथ-साथ इससे बचने के लिए टीबी के लक्षण और सावधानियों के बारे में अच्छी तरह से जागरूक करें।

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