जमुई, मो० अंजुम आलम। 22 जनवरी को आयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर डिहरी के राजद विधायक फतेह बहादुर सिंह ने एक बार फिर जमुई में विवादित बयान दिया है। उन्होंने भाजपा व केंद्र की सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तल्ख लफ्जों में भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए आयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अंधविश्वास फैलाया जा रहा है।
22 तारीख को पत्थर में प्राण डाला जाएगा, राम में प्राण डाला जाएगा, इतने दिन से राम बिना प्राण के थे क्या,उनके अंदर प्राण नहीं था क्या? आगे उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद अयोध्या में राम मंदिर का अवशेष मिला ही नहीं। इस बात की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट भी करती है। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद ध्वस्त होने के बाद अयोध्या में हुई खुदाई में सम्राट अशोक और गौतम बुद्ध के काल के अवशेष मिले न की रामायण काल के, इसकी पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने ही किया है।
वहीं मीडिया कर्मी के पूछे गए एक सवाल पर आगे उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले ने 170 वर्ष पहले कहा था और उसी बात को भीम राव अंबेडकर ने भी कहा था कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा। और जिस दिन मंदिर का भीड़ विद्यालय के तरफ मुड़ेगा उस दिन भारत को महान बनने से कोई रोक नहीं सकता है। अगर उनका कथन गलत है तो यह कह दें कि सावित्री बाई फुले,बाबा भीम राव अंबेडकर गलत हैं। लेकिन कह नहीं सकते हैं इनलोगों का एजेंडा ही है मनुवाद का, पाखंड वाद का ,अंधविश्वास का।
आगे विधायक फतेह बहादुर सिंह इतना पर ही नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग पत्थर में प्राण डाल रहे हैं ऐसे लोंगो की एक सूची केन्द्र सरकार को बनानी चाहिए और सूची बनाने के बाद केन्द्र सरकार प्राण डालने वालों को देश की सीमा पर हर बटालियन के साथ और देश के सभी अस्पतालों में तैनात कर देना चाहिए।ताकि सीमा पर जिन जवानों की मौत होगी उसमें ये लोग प्राण डाल देंगे और अस्पताल में जिनकी मौत होगी उसमें भी प्राण डाल दिया जएगा।
उन्होंने कहा कि जिस राम मंदिर की बात ये लोग कर रहे हैं उसको लेकर ललई सिंह यादव ने 1976 में सच्ची रामायण को लेकर जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था उसमें स्पष्ट था कि रामायण और रामायण के सारे पात्र काल्पनिक हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनेता का या राजनीतिक दलों का काम मंदिर और मस्जिद बनाने का नहीं है बल्कि सत्ता में बैठे लोगों का काम है देश की जनता की सेवा करना और उसके विकास के बारे में सोचना।न कि अंधविश्वास को बढावा देना।
जन्होने कहा कि अगर मंदिर से सब कुछ होने वाला था तो कोरोना काल में मंदिर को बंद कर अस्पताल को क्यों खोल कर रखा गया, अगर मंदिर से ही सब कुछ होने वाला था तो कोरोना काल में सारे अस्पताल को बंद कर देते और सारे मरीज को मंदिर में भर देते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने ही साबित कर दिया कि मंदिर में कोई शक्ति नहीं है और जहां कोई शक्ति नहीं है उसमें देश का अरबों-खरबों खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके अलावा कई गंभीर आरोप भी उन्होंने भाजपा पर लगाया है और कई ऐसे विवादित बयान भी दिए हैं।
