बिहार

मानवाधिकार का संरक्षण नितांत आवश्यक : डॉ तारकेश्वर पंडित

वैशाली, न्यूज क्राइम 24। जिला मुख्यालय हाजीपुर स्थित देवचंद महाविद्यालय के सभागार में मानवाधिकार टुडे और देवचंद महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विश्व मानवाधिकार दिवस के पूर्व संध्या पर ‘वर्तमान परिवेश में मानवाधिकार का महत्व’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा का उदघाटन देवचंद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ तारकेश्वर पंडित, केंट होमियो कॉलेज के प्राचार्य डॉ जितेंद्र कुमार, देवचंद महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ दाऊदी जी, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सत्यप्रकाश कुमार और मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ शशि भूषण कुमार ने संयुक्त रूप दीप प्रज्ज्वलित किया।

परिचर्चा को संबोधित करते हुए डॉ तारकेश्वर पंडित ने कहा कि मानवाधिकार बिना किसी भेदभाव सभी को प्राप्त अधिकार है। इसके बिना व्यक्ति का जीवन संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान परिवेश में मानवाधिकार की महत्ता अधिक है। इसलिए इसका संरक्षण किया जाना नितांत आवश्यक है।डॉ दाऊदी ने कहा कि मानवाधिकार का विचार मानव सभ्यता जितना पुराना है। मानवाधिकार के अंतर्गत व्यक्ति सम्मानयुक्त और भयमुक्त जीवन जीता है। परिचर्चा को संबोधित करते हुए डॉ. शशि भूषण कुमार ने कहा कि इस परिचर्चा का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों और आम जनमानस में उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता लाना है।

उन्होंने आगे कहा कि 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है क्योंकि 10 दिसंबर, 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणापत्र को स्वीकार किया था। उन्होंने मानव सम्मान पर बल दिया।डॉ सत्यप्रकाश10 कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान के भाग 3 के अंतर्गत 6 प्रकार के मौलिक अधिकार प्रदान किए गए है। इसे महाअधिकार पत्र भी कहा जाता है। वक्ता के रूप में उपस्थित रविन्द्र कुमार रतन ने अपने ओजस्वितापूर्ण वाणी से मानवाधिकार के विभिन्न आयामों की चर्चा की।

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शिक्षाविद डॉ शिव बालक राय प्रभाकर ने कहा मानवाधिकार हमें सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार देता है। हमें अधिकारों के उपभोग के साथ-साथ कर्तव्य पालन पर भी बल देना चाहिए। समारोह में उपस्थित मानव अधिकार कार्यकर्ता अमित कुमार ‘विश्वास’ ने कहा कि मानवाधिकार शब्द का प्रथम प्रयोग अमरीकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट द्वारा सर्वप्रथम प्रयोग किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि 10 दिसंबर, 1948 को स्वीकृत यूडीएचआर का स्पष्ट प्रभाव भारतीय संविधान पर है। भारतीय संविधान के अनेक प्रावधान इसे मानवतावादी बनाते है।
समारोह में मंच संचालन अमित कुमार ‘विश्वास’ ने किया।

समारोह में आदिल परवेज, कुंदन कृष्णा, डॉ मो० अबुलैस, डॉ आलोक कुमार सिंह, प्रो. आतिफ रब्बानी, डॉ मीना, डॉ मो. सुल्तान अकबर खान, डॉ अवनीश कुमार मिश्रा, डॉ. मीना कुमारी, डॉ. ओम प्रकाश सहित बड़ी संख्या स्वयंसेवक, शिक्षक एवं विद्यार्थीगण शामिल हुए।

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