पटना, अजीत। जमुई में नाबालिग से बदसलूकी के मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ तस्वीर साझा किए जाने पर विवाद बढ़ गया है. तस्वीर कुछ देर बाद हटा दी गई. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि तस्वीर से पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ.
इसी मामले में पाटलिपुत्र की राजद सांसद डॉ. मीसा भारती शुक्रवार को सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की. मीसा भारती ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि वह पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंची थीं, लेकिन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया.
मीसा भारती ने कहा कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना कानून के तहत गंभीर विषय है. उन्होंने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमुई मामले से जुड़े वीडियो साझा करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पुलिस पीछे हट रही है.
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने पर सवाल उठाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ.
दरअसल, जमुई मामले की पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिली थी. मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर और न्याय का भरोसा देने से जुड़ा संदेश पोस्ट किया गया था. विवाद के बाद पोस्ट हटा दी गई। मामले में अब मीसा भारती की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
