पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) भारतीय जनता पार्टी नहीं छू पाई अकेले 272 का आंकड़ा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन हालांकि सरकार बनाने में सफल रहा है लेकिन अबकी बार 400 पार का उनका नारा खोखला साबित हुआ। इंडी गठबंधन के नतीजे सकारात्मक रहे हैं। इंडी गठबंधन के कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भाजपा की हवा निकाल दी।
एनडीए में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू अब तुरप के इक्के की भूमिका में रहेंगे। कई प्रमुख चेहरे चुनाव हार गए स्मृति ईरानी, मेनका गांधी, अधीर रंजन चौधरी ,महबूबा मुफ्ती ,उमर अब्दुल्ला यह मतदाताओं की सूझबूझ को दिखाता है। पप्पू यादव, चंद्रशेखर रावण, चिराग पासवान, खालिस्तान समर्थक अमृतपाल का चुनाव जीतना राजनीति की गत्यात्मकता को दिखाता है।
एग्जिट पोल के दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं।
आम आदमी पार्टी आशा के अनुकूल प्रदर्शन नहीं कर पाई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया।
राजद के तेजस्वी यादव भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए
राजस्थान में भाजपा का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा है जितना रहना चाहिए वसुंधरा राजे सिंधिया को साइड में करना भाजपा को भारी पड़ा हालांकि वसुंधरा के बेटे दुष्यंत सिंह पांचवीं बार चुनाव जीतने में सफल रहे।
राजस्थान में इंडी गठबंधन का प्रयोग सफल रहा है इंडी गठबंधन के तीनों प्रत्याशी चुनाव जीते हैं हनुमान बेनीवाल, अमराराम, और राजकुमार रोत। केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ से आठवीं बार चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं।
बिहार में नीतीश कुमार को महिला मतदाता और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं ने फायदा पहुंचाया है। हालांकि राजस्थान में अति पिछड़ा वर्ग का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाया।
इस लोकसभा चुनाव में आठ कम्युनिस्ट सांसद बन गए
भाजपा को 42.74 % मत मिले हैं। कांग्रेस को 40.66% मत मिले हैं।मतदान प्रतिशत में कांग्रेस बीजेपी से ज्यादा पीछे नहीं रही है। हालाकि सीटों के मामले में कांग्रेस बीजेपी से काफी पीछे हैं।
अयोध्या में भाजपा प्रत्याशी की हार ने यह बता दिया है कि मतदाता अपनी व्यक्तिगत आस्था और मतदान व्यवहार के बीच में अंतर रखते हैं। राहुल गांधी रायबरेली और वायानाड दोनों सीटों से भारी मतों से विजय हुए। जबकि अमेठी में राहुल गांधी के नजदीकी ने स्मृति ईरानी को हराया।
इस लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी को भी एक बार पुनर्विचार के लिए मजबूर कर दिया है। भारत के मतदाता ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी सरकार को खुली छूट नहीं देंगे वह सरकार को अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं।
सोनू कुमार,पत्रकार
