बिहार

नरपतगंज अंचल कार्यालय में म्यूटेशन और परिमार्जन के नाम पर हल्काकर्मचारी और डाटा ऑपरेटर कर रहे है अवैध उगाही

अररिया, रंजीत ठाकुर।   नरपतगंज अंचल अंतर्गत अंचल कार्यालय में अवैध वसूली का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए नए नए नियम लागू करती है परंतु भ्रष्टाचारियों के आगे सारे नियम बेकार नजर आ रहे हैं। जमीन संबंधित दाखिल खारिज, लगान रसीद, परिमार्जन आदि कार्यों को लेकर आम आवाम के द्वारा सरकार को बार-बार शिकायत मिल रही थी कि इन कार्यों के बदले अवैध वसूली पदाधिकारियों एवं संबंधित कर्मी के द्वारा किया जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए जमीन से जुड़े कार्यों को ऑनलाइन कर दिया गया है ।

लेकिन भ्रष्ट कर्मी एवं पदाधिकारी के चलते भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। अंचल कार्यालय में कुछ डाटा ऑपरेटरों के द्वारा परिमार्जन के नाम पर लोगों से ₹1000 से 3000 तक की वसूली की जाती है रुपैया नहीं देने पर परिमार्जन को पेंडिंग में रख दिया जाता है जबकि सेवा नियम के अंतर्गत ससमय आवेदन के आधार पर ही जांच कर सुधार कर देना चाहिए। अंचल कर्मी ऐसा नहीं करते हैं,वे आवेदनकर्ता से व्यक्तिगत संपर्क बनाते हैं और अवैध वसूली के बाद ही सेवा देते हैं।


वहीं म्यूटेशन के नाम पर इसी प्रकार से 5000 से ₹20000 तक की वसूली की जाती है। आपसी बटवारा के तहत लोग दाखिल खारिज कराने जाते हैं तो हल्का कर्मचारी कहते है,” रजिस्ट्री करवाते हैं तो 50000 हजार रुपया देते है,हम दाखिल खारिज करेंगे तो10,000 देना होगा”। गरीब व लाचार जनता दौड़ते दौड़ते थक जाते हैं और मजबूर होकर घूस की राशि देने पड़ते हैं। जनता क्या करें, किसके पास जाएं! बताते चलें कि बिहार में सरकार भूमि सुधार चाहती है लेकिन भू राजस्व विभाग भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ है। इसलिए सुधार होगा कि नहीं यह कहना मुश्किल है।


क्या कहते हैं अंचल पदाधिकारी नरपतगंज :-

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इस बाबत संवाददाता के द्वारा पूछे जाने पर अंचल पदाधिकारी नरपतगंज ने बताया भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा रिश्वत लेने वाले पर कड़ी नजर रहेगी। दाखिल खारिज आवेदन में ऐसा मामला मेरे सामने आया तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि सरकार के द्वारा दाखिल खारिज आवेदन ऑनलाइन अप्लाई करने का सिस्टम बनाया गया है और उसी सिस्टम के आधार पर हल्का कर्मचारी के जांच प्रतिवेदन के बाद अंचल निरीक्षक के अनुशंसा के पश्चात अंचल पदाधिकारी आवेदन को स्वीकृत करते हैं। परंतु ऐसा देखा नहीं जा रहा है।

दाखिल खारिज आवेदन 2020-21, 21-22 तथा 22-23 के दर्जनों मामला हल्का कर्मचारी और सीओ के डोंगल पर रुका हुआ है। तो वहीं दलालों के द्वारा वैसे आवेदन कर्ता को खोज कर हल्का कर्मचारी के पास जाने के लिए कहा जाता है।यहाँ तक कि दलालों के द्वारा आवेदक को रिश्वत की राशि ले जाने के लिए कह दिया जाता है। रिश्वत की राशि नहीं ले जाने पर दाखिल खारिज आवेदन को पेंडिंग कर दिया जाता है ,नहीं तो मनगढ़ंत आपत्ति लगाकर केश रिजेक्ट कर दिया जाता है। एक ऐसा ही मामला मानिकपुर पंचायत के एक म्युटेशन आवेदन कर्ता ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया है कि मेरा एक 10 साल पुराना केवाला है जिसका म्यूटेशन का अप्लाई एक वर्ष पूर्व 22/23 में किए हुए हैं जिसका म्यूटेशन करने के लिए हल्का कर्मचारी के द्वारा ₹20000 रुपये की मांग किया जा रहा है।

वहीं स्थानीय दलालों के द्वारा यह कहा जा रहा है कि रुपया नहीं देने पर आपका जमीन का म्यूटेशन कभी नहीं हो पाएगा। इस बात को लेकर पीड़ित भू-स्वामी ने संवाददाता को बताया कि मुझे डर है कि मेरा नाम अगर उजागर हुआ तो हल्का कर्मचारी के द्वारा मेरे जमीन का म्यूटेशन को रिजेक्ट कर दिया जाएगा। बताते चलें कि जहां बिहार सरकार भ्रष्टाचारियों एवं भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, वहीं भ्रष्ट सरकारी कर्मी के द्वारा बिना डर भय के रिश्वत लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। कभी बंद कोठरी में तो कभी शाम ढलते ही रिश्वत की राशि की वसूली की जाती है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को रोकने के लिए लोग बताते हैं अंचल क्षेत्र में रेवेन्यू विभाग के जो भी कर्मी है उसकी उच्च स्तरीय जांच हो तो रिश्वतखोरी की मामला साफ-साफ दिखने लगेगा।

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