फुलवारीशरीफ, अजीत। महायज्ञ के दौरान प्रवचन करते हुए स्वामी जीयर स्वामी ने कहा कि मनुष्य का जीवन बहुत छोटा और अनिश्चित होता है. उन्होंने कहा कि जैसे पानी का बुलबुला पल भर में बनता और समाप्त हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी क्षणिक है. इसलिए जीवन को व्यर्थ के झगड़े, अहंकार और लालच में न गंवाकर धर्म, सदाचार और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए।
स्वामी जीयर स्वामी ने कहा कि आज के समय में लोग जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूलते जा रहे हैं. मनुष्य केवल भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे में उलझकर अपने कर्तव्य और धर्म से दूर होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य बोलना, दूसरों की मदद करना, बड़ों का सम्मान करना और समाज में प्रेम व भाईचारे को बढ़ाना भी धर्म का ही हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने धर्म को नहीं समझता, वह जीवन की सच्चाई से दूर हो जाता है. धर्म मनुष्य को सही रास्ता दिखाता है और उसे अच्छे और बुरे कर्मों के बीच अंतर समझाता है. उन्होंने कहा कि भागवत में बताए गए चार प्रकार के अपराधों से मनुष्य को बचना चाहिए, क्योंकि गलत कर्म व्यक्ति को पतन की ओर ले जाते हैं।
स्वामी जीयर स्वामी ने कहा कि संयम और मर्यादा से जीवन जीने वाला व्यक्ति समाज में सम्मान प्राप्त करता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने जीवन में सादगी, सेवा भाव और भगवान के प्रति श्रद्धा को अपनाएं. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने कर्मों को सुधारता है और धर्म के मार्ग पर चलता है, तब उसका जीवन सफल और सार्थक बनता है। प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और स्वामी जीयर स्वामी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना. उनके संदेश से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक जागरूकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता दिखाई दिया।
