पटना(न्यूज क्राइम 24): जिला पदाधिकारी, पटना डॉ. चन्द्रशेखर सिंह के निदेश पर उप विकास आयुक्त, पटना श्री तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में आज समाहरणालय स्थित सभागार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 नियम 1995 के तहत गठित जिला सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक हुई।
कैलेण्डर वर्ष 2023 में समिति की यह द्वितीय बैठक थी। डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि विगत कैलेण्डर वर्ष में प्रावधानों के अनुसार 04 निर्धारित बैठकों में सभी 04 बैठकों का आयोजन किया गया था। इस वर्ष भी सभी 04 बैठकों का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रति अत्याचार के विरूद्ध शून्य सहिष्णुता के सिद्धान्त का अक्षरशः अनुसरण किया जा रहा है। अत्याचार निवारण प्रक्रिया में सम्पूर्ण तंत्र संवेदनशील, तत्पर एवं सजग है।
आज की बैठक में समिति के सदस्य-सचिव-सह-जिला कल्याण पदाधिकारी, पटना श्री राणा वैद्यनाथ प्रसाद सिंह द्वारा विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। डीडीसी श्री सुल्तानिया द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 नियम-1995 के अन्तर्गत आयोजित विगत बैठक के अनुपालन स्थिति की समीक्षा की गई तथा अद्यतन प्रगति का जायजा लिया गया। अधिनियम अंतर्गत दर्ज मामलों की समीक्षा की गई। पुलिस द्वारा प्रतिवेदित एवं निष्पादित कांडों, समर्पित आरोप पत्रों, गिरफ्तारियों एवं मुआवजा भुगतान से संबंधित मामलों के भौतिक एवं वित्तीय प्रतिवेदन पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में माननीय जन-प्रतिनिधियों एवं अन्य सदस्यों द्वारा अपना-अपना सुझाव दिया गया। डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि सुझावों पर नियमानुसार अपेक्षित कार्रवाई की जाएगी।
जिला कल्याण पदाधिकारी ने समिति के माननीय सदस्यों के संज्ञान में लाया कि दिनांक 11.04.2023 को पिछली बैठक से अब तक प्राप्त 102 मामलों में शत-प्रतिशत मामलों में 149.37 लाख रुपया का मुआवजा भुगतान कर दिया गया है। प्रथम बैठक में प्राप्त 226 मामलों में शत-प्रतिशत मामलों में 103.27 लाख रुपया का मुआवजा भुगतान किया गया था। कैलेण्डर वर्ष 2022 में 428 लाभुकों को मुआवजा भुगतान किया गया।
सीसीटीएनएस पोर्टल प्रतिवेदन के अनुसार पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकी के 390 स्वीकृत मामलों में 388 के विरूद्ध भुगतान कर दिया गया है। भुगतान हेतु लंबित 02 मामले भी स्वीकृत हैं। तकनीकी कारणों यथा पीएफएमएस पोर्टल पर पीड़ित का खाता एवं आधार एप्रूव नहीं होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सका है। जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा वित्तीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके अनुसार 102 लाभुकों के बीच 149.37 लाख रुपया मुआवजा, राहत अनुदान, पेंशन एवं पुनर्वास की राशि का भुगतान किया गया है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत हत्या के मामले में कुल 67 मृतकों के आश्रितों को पेंशन की राशि प्रदान की जा रही है। अप्रैल, 2023 तक पेंशन भुगतान किया जा चुका है।
डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि अधिनियम के तहत लंबित कांडों के निष्पादन हेतु त्वरित अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण करने तथा ससमय राहत अनुदान की राशि उपलब्ध कराने के लिए सभी कार्रवाई की गयी है। राज्य सरकार के संकल्प के उपबंधों के अनुसार अत्याचार के पीड़ितों, उनके परिवार के सदस्यों और आश्रितों को 24 घंटा के अंदर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही उक्त योजना के तहत अन्य सुविधाएं निर्धारित समय में उपलब्ध करायी जाती है। डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि सुसंगत धाराओं के तहत निर्धारित अवधि में अन्वेषण और आरोप पत्र दाखिल करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 नियमावली 1995 के नियम 11(1) के तहत गवाह/साक्षी को आने-जाने के लिए 200 रुपया प्रति गवाह यात्रा भत्ता तथा एक दिन की निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की राशि की समतुल्य राशि 357 रुपया प्रति गवाह दैनिक भत्ता कुल 557 रुपये प्रति गवाह देने का प्रावधान है। इसके तहत संभवतः बिहार में पहली बार पटना जिले के कुल 18 व्यक्तियों को 10,026 रूपया की राशि का भुगतान किया गया है। इसके नियमित कार्यान्वयन हेतु सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की गई है। डीडीसी श्री सुल्तानिया द्वारा इस पर प्रसन्नता व्यक्त की गई।
डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि अधिनियम अतर्गत नियम 15 (1) (घ) के तहत सरकारी उपक्रम में रोजगार प्रदान किया जाता है। मृतक श्री सूरज पासवान की आश्रिता उनकी पत्नी श्रीमती अनिता कुमारी को कार्यालय परिचारी के पद पर नौकरी हेतु पूर्व में ही नियुक्ति पत्र प्रदान कर दिया गया है। पटना ज़िला में यह पहली बार हुआ है। उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी को ऐसे अन्य मामलों में त्रुटि का निराकरण करते हुए प्रावधानों के अनुसार कार्य करने का निदेश दिया।
डीडीसी श्री सुल्तानिया ने सभी अनुमण्डल पदाधिकारियों को नियम 17(क) के तहत अनुमण्डल स्तरीय सर्तकता एवं अनुश्रवण समिति की नियमित बैठक आयोजित करने का निदेश दिया।
डीडीसी श्री सुल्तानिया ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करने का निदेश दिया। उन्होंने अधिनियम के तहत प्राप्त होने वाले मामलों को संवेदनशीलता के साथ ससमय निष्पादित करने का निदेश दिया। अधिनियम के प्रावधानों का वृहत स्तर पर प्रचार-प्रसार करने का निदेश दिया गया।
डीडीसी श्री सुल्तानिया ने कहा कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु हम सबको दृढ़संकल्पित रहना होगा।
इस बैठक में उप विकास आयुक्त के साथ अपर समाहर्ता, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक पश्चिमी, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, उत्पाद अधीक्षक के प्रतिनिधि, सिविल सर्जन के प्रतिनिधि एवं समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उपस्थित थे।
