फुलवारी शरीफ, अजीत : इमारत ए शरिया बिहार, ओडिशा व झारखंड के पूर्व नाज़िम मौलाना मोहम्मद शिबली अल कासमी ने बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के शताब्दी समारोह के अवसर पर कहा कि मदरसों ने एक सदी से शिक्षा, नैतिक प्रशिक्षण और सामाजिक सुधार में अहम योगदान दिया है. उन्होंने बोर्ड के अध्यक्ष सलीम परवेज को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी.
उन्होंने कहा कि मदरसों के अस्तित्व को बचाने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए. उन्होंने मांग की कि जिन मदरसों का निरीक्षण पूरा हो चुका है, उनके शिक्षकों का वेतन तुरंत जारी किया जाए, पुराने हुफ्फाजों का वेतन चपरासी से भी कम है उसमें सुधार किया जाए, वृद्ध शिक्षकों को पीएफ की सुविधा मिले और शिक्षकों को मकान किराया, चिकित्सा भत्ता तथा वेतन वृद्धि दी जाए.
मौलाना कासमी ने कहा कि मदरसों की वित्तीय स्थिरता के लिए स्थायी बजट आवंटित होना चाहिए, भवन निर्माण को सरल बनाया जाए और आधुनिक शिक्षा जैसे विज्ञान व कंप्यूटर को मजबूती से शामिल किया जाए. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार मदरसों और शिक्षकों की समस्याओं का प्राथमिकता पर समाधान करेगी.
