महावीर मंदिर में दुर्गापूजा : भक्त अपने नाम और गोत्र से करा सकेंगे कलश स्थापना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> दुर्गापूजा के अवसर पर पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भक्त मंदिर परिसर में अपने नाम और गोत्र से कलश स्थापित करवाकर मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना और पाठ करा सकेंगे। मंदिर में कलश स्थापना कर मां भगवती की आराधना की यह परंपरा पिछले कई वर्षों से चली आ रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>वेबसाइट से भी करा सकते हैं बुकिंग-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी नवरात्र के अवसर पर कलश स्थापना की व्यवस्था की गई है। जो श्रद्धालु नवरात्र में अपने नाम से अनुष्ठान कराना चाहते हैं&comma; वे मंदिर के बुकिंग काउंटर के अलावा आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग करा सकते हैं। मंदिर में कलश स्थापना के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहले ही बुकिंग करा चुके हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विभिन्न अनुष्ठानों के लिए निर्धारित शुल्क-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दुर्गासप्तशती पाठ &lpar;सम्पुट&rpar; — ₹2&comma;310<br &sol;>इस पाठ में श्रीदुर्गासप्तशती के 13 अध्यायों के सात सौ मंत्रों के आगे-पीछे विशेष बीजमंत्र जोड़कर सम्पुट पाठ किया जाता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार सामान्य पाठ की तुलना में इसमें लगभग तीन गुना अधिक समय लगता है और धार्मिक मान्यताओं में इसे फलदायी माना गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दुर्गासप्तशती पाठ &lpar;साधारण&rpar; — ₹1&comma;110<br &sol;>इस अनुष्ठान में अर्गला&comma; कीलक&comma; कवच&comma; शापोद्धार&comma; शतनाम&comma; मूल 13 अध्याय तथा अंत में ऋग्वेद के देवी-सूक्त का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पाठ किया जाता है। इसे पूरा होने में लगभग ढाई घंटे का समय लगता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कलश स्थापना&sol;दुर्गा पाठ सहित &lpar;नौ दिन&rpar; — ₹8&comma;250<br &sol;>इसमें कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक दुर्गा पाठ कराया जाएगा। कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहा जाता है और यह नवरात्रि में देवी आराधना का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। नौ दिनों के दौरान देवी के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है।<&sol;p>&NewLine;

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