फुलवारीशरीफ, अजित। कुष्ठ रोग उन्मूलन की राष्ट्रीय मुहिम को नई गति देते हुए एम्स पटना के त्वचा रोग विभाग ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ लेप्रोलॉजिस्ट्स के सहयोग से लेपकॉन 2026 का 33वां द्विवार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया. तीन सौ से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी ने संस्थान को शोध, नीति और नवाचार का प्रमुख केंद्र बना दिया। 27 फरवरी को आयोजित प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला में युवा चिकित्सकों को आधुनिक जांच तकनीक, दवा प्रतिरोध, विकलांगता रोकथाम और जनस्वास्थ्य रणनीतियों की व्यावहारिक जानकारी दी गई. इसके बाद दो दिनों तक चले वैज्ञानिक सत्रों में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत हुए और कुष्ठ उन्मूलन की भविष्य की रणनीतियों पर गंभीर विमर्श हुआ।
सम्मेलन का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. स्वेतलिना प्रधान ने किया. आयोजन में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, आईसीएमआर-राष्ट्रीय जलमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टीरियल रोग संस्थान, द लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया तथा शिफेलिन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहो मुख्य अतिथि रहे. उनके साथ संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. राजू अग्रवाल और केंद्रीय कुष्ठ प्रभाग की अतिरिक्त महानिदेशक लिली गंगमेई मौजूद रहीं। सम्मेलन के दौरान “एडवर्स क्यूटेनियस ड्रग रिएक्शन्स” और “आईएएल हैंडबुक ऑफ लेप्रोसी” पुस्तकों का विमोचन भी किया गया. लेपकॉन 2026 ने यह संदेश दिया कि शोध, संवेदनशीलता और संस्थागत सहयोग के समन्वय से ही कुष्ठ-मुक्त भारत का लक्ष्य साकार हो सकता है।
