फुलवारीशरीफ, अजीत। विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर एम्स पटना आई बैंक ने 100वां कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरा कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. आई बैंक की शुरुआत मई 2025 में हुई थी और करीब डेढ़ साल में 100 मरीजों का कॉर्नियल ट्रांसप्लांट किया गया. इस दौरान आई बैंक को 118 नेत्रदान प्राप्त हुए हैं।
एम्स पटना के अनुसार, नेत्रदान से प्राप्त कॉर्नियल ऊतकों का उपयोग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में किया गया. इससे कॉर्नियल अंधत्व से पीड़ित मरीजों में दृष्टि लौटने की उम्मीद बढ़ी है. 100वें कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की उपलब्धि नेत्र रोग विभाग और आई बैंक की पूरी टीम के समन्वित प्रयास का परिणाम है।
इस कार्य में आईसीयू, एचडीयू और विभिन्न वार्डों के प्रभारी, नर्सिंग कर्मियों, ऑपरेशन थिएटर कर्मियों तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. नेत्रदान के लिए परामर्श देने से लेकर कॉर्निया प्राप्त करने, उसके संरक्षण और प्रत्यारोपण तक की प्रक्रिया में टीम के सदस्यों ने योगदान दिया।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने 100वें कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की उपलब्धि पर आई बैंक और नेत्र रोग विभाग की टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि कॉर्नियल अंधत्व को कम करने में सामुदायिक सहभागिता और स्वैच्छिक नेत्रदान की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने अधिक से अधिक मरीजों को दृष्टि का लाभ पहुंचाने के लिए कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।
डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह ने भी आई बैंक टीम को बधाई देते हुए संस्थान में नेत्र बैंकिंग और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सेवाओं को और मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की. डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) संजय पांडे और पूर्व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) अनूप कुमार ने भी टीम को बधाई दी और नेत्रदान के महत्व पर प्रकाश डाला।
एम्स प्रशासन ने 100वें कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की उपलब्धि को उन नेत्रदाताओं और उनके परिवारों को समर्पित किया, जिन्होंने नेत्रदान के माध्यम से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में दृष्टि और उम्मीद की नई रोशनी पहुंचाने का काम किया. संस्थान ने आम लोगों से स्वैच्छिक नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की।
कार्यक्रम में एम्स के विभिन्न विभागों के चिकित्सक और संकाय सदस्य मौजूद रहे. कार्यक्रम का संचालन नेत्र रोग विभाग की सह प्राध्यापक डॉ. दिव्या केसरवानी ने किया. डॉ. सोनी सिन्हा, डॉ. भावेश चंद्र साहा, डॉ. देव कांत और डॉ. अमित कुमार समेत विभाग के अन्य चिकित्सकों, वरिष्ठ व कनिष्ठ रेजिडेंट, प्रशिक्षु, नेत्रमिति विशेषज्ञ, आई बैंक तकनीशियन-सह-परामर्शदाता, नर्सिंग अधिकारियों और सहयोगी कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भावेश चंद्र साहा ने किया।
