बिहार

लावारिस बुजुर्ग महिला को मिला सहारा, मदर टेरेसा सेवाकेंद्र में रखकर की जा रही देखभाल पहचान की अपील

आरा, (न्यूज़ क्राइम 24) भोजपुर जिले के गड़हनी-अगिआंव थाना क्षेत्र में बिहार पुलिस की डायल 112 टीम को एक गुमशुदा, असहाय और लावारिस बुजुर्ग महिला मिली। घटना 5 नवंबर की देर रात धनतेरस के अवसर पर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। महिला की स्थिति को देखते हुए थाना पुलिस ने उन्हें अपने संरक्षण में लिया और इसके बाद थाना प्रभारी की ओर से टीम मदर टेरेसा सेवाकर्मी एवं संत रविदास जनसेवा संगठन, भोजपुर-आरा के संस्थापक महासचिव एवं समाजसेवी अमरदीप कुमार जय को इसकी सूचना दी गई।

समाजसेवी अमरदीप कुमार जय के प्रयास एवं सहयोग से महिला को आरा के महाराणा प्रताप नगर स्थित मिशन चैरिटी द्वारा संचालित मदर टेरेसा सेवाकेंद्र परिसर में सुरक्षित रखा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।

अब तक नहीं हो सकी महिला की पहचान

फिलहाल बुजुर्ग महिला की पहचान नहीं हो सकी है। महिला अपना नाम, पता और परिजनों के संबंध में जानकारी देने में असमर्थ हैं। उनसे कुछ भी पूछने पर वह किसी अन्य अथवा समझ में नहीं आने वाली भाषा में चिल्लाने लगती हैं या रोने लगती हैं। आशंका जताई जा रही है कि वह मानसिक कमजोरी अथवा किसी बीमारी से पीड़ित हो सकती हैं। हालांकि, उनकी वास्तविक स्थिति का पता चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा।

समाजसेवी अमरदीप कुमार जय ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई इस महिला को पहचानता है या इनके परिजनों के संबंध में जानकारी रखता है तो गड़हनी थाना प्रभारी अथवा उनसे संपर्क करें, ताकि महिला को सकुशल उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।

भोजपुर में लावारिस मरीजों के लिए आश्रय स्थल नहीं होने पर उठाए सवाल

इस मामले को लेकर समाजसेवी अमरदीप कुमार जय ने भोजपुर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और लावारिस मरीजों की देखभाल के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं होने पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे असहाय, गुमशुदा और लावारिस बुजुर्ग महिला-पुरुषों को सुरक्षित रखने, उनका इलाज कराने और देखभाल करने के लिए पर्याप्त सरकारी अथवा गैर सरकारी आश्रय स्थल उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार पुलिस ऐसे असहाय लोगों को सदर अस्पताल पहुंचा तो देती है, लेकिन उनके साथ देखभाल करने वाला कोई व्यक्ति या सामाजिक संगठन नहीं होने की स्थिति में उनकी समुचित देखभाल और इलाज प्रभावित होता है। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए अलग से चिह्नित वार्ड, पर्याप्त बेड और समुचित देखभाल की व्यवस्था का अभाव है। उनके अनुसार, ऐसे मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिलने से उनकी स्थिति और गंभीर हो जाती है।

अमरदीप कुमार जय ने जिला स्वास्थ्य प्रशासन, सिविल सर्जन, अस्पताल अधीक्षक, उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अस्पताल में सफाई, सुरक्षा, चादर धुलाई और अन्य कई कार्य आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराए जा रहे हैं, लेकिन लावारिस मरीजों की देखभाल के लिए पर्याप्त मानव संसाधन, वार्ड बॉय, स्ट्रेचर बॉय और नर्सिंग कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

उन्होंने इस स्थिति के लिए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना है कि जिलाधिकारी जिला स्वास्थ्य समिति एवं रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष होते हैं, इसलिए इस दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है।

2017 से आश्रय केंद्र के लिए कर रहे प्रयास

समाजसेवी ने बताया कि संत रविदास जनसेवा संगठन एवं टीम मदर टेरेसा सेवाकर्मी, भोजपुर-आरा वर्ष 2017 से ही जिले में लावारिस, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों के लिए स्थायी आश्रय स्थल, सेवा केंद्र और उपचार की व्यवस्था स्थापित कराने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में जिलाधिकारी भोजपुर, आरा नगर निगम, स्थानीय सांसद एवं विधायक को कई बार लिखित आवेदन देकर जमीन चिह्नित कर आश्रय केंद्र स्थापित करने की मांग की गई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है और आवेदनों पर भी अपेक्षित जवाब नहीं मिला है।

अमरदीप कुमार जय ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की कि भोजपुर जिले में लावारिस एवं बेसहारा लोगों के लिए स्थायी आश्रय स्थल, उपचार केंद्र और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि सड़क पर मिलने वाले असहाय लोगों को सम्मानजनक जीवन और समय पर इलाज मिल सके।

फिलहाल मदर टेरेसा सेवाकेंद्र में सुरक्षित रखी गई बुजुर्ग महिला की पहचान और उनके परिजनों की तलाश की जा रही है।

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