फुलवारीशरीफ, अजीत। स्थापना के 15 वर्ष पूरे होने के बाद एम्स पटना ने चिकित्सा सेवा, शिक्षा, शोध और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. हालांकि आज भी यहां आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों को संसाधनों की कमी के कारण इलाज के लिए बेड का इंतजार करना पड़ता है और कई मरीजों को तत्काल बेड नहीं मिलने पर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. इसके बावजूद गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे हजारों मरीजों का सफल इलाज कर एम्स पटना बिहार और आसपास के राज्यों के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है.
एम्स पटना के प्रति आम लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन 10 हजार से अधिक मरीज इलाज और चिकित्सकीय परामर्श के लिए संस्थान पहुंच रहे हैं. मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल पर सुविधाओं और संसाधनों का दबाव भी बढ़ा है. संस्थान की ओर से बेड, विभागों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
शुक्रवार को एम्स पटना के 15वें स्थापना दिवस समारोह में संस्थान की उपलब्धियों के साथ आने वाले वर्षों की योजनाओं को भी सामने रखा गया. समारोह में एम्स पटना के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आर. के. धीमन ने संस्थान को पूरे बिहार के लिए अंग प्रत्यारोपण केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बिहार में ही अंग प्रत्यारोपण जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से राज्य के मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम होगी.
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में एम्स पटना में मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक, व्यापक कैंसर सेंटर और एआई स्पेशल पर्पज हब स्थापित करने की योजना है. इन परियोजनाओं के जरिए मातृ एवं शिशु चिकित्सा, कैंसर उपचार तथा आधुनिक तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए संस्थान में विभिन्न विभागों का विस्तार किया जा रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं के साथ चिकित्सा शिक्षा, शोध और नवाचार को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि एम्स पटना आने वाले वर्षों में और अधिक व्यापक स्तर पर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा सके.
आईआईएम बोधगया के साथ हुआ एमओयू
स्थापना दिवस समारोह के दौरान एम्स पटना और आईआईएम बोधगया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इसका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है. समझौते के तहत संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और संगोष्ठियां आयोजित करने के साथ हेल्थकेयर मैनेजमेंट से जुड़े खुले नामांकन और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की दिशा में काम किया जाएगा.
समारोह की मुख्य अतिथि आईआईएम बोधगया की संस्थापक निदेशक विनिता एस. सहाय ने संस्थानों में उत्कृष्टता, नवाचार और नेतृत्व की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की भूमिका और लगातार सीखने तथा नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
छह फैकल्टी सदस्यों को किया गया सम्मानित-
स्थापना दिवस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के लिए छह फैकल्टी सदस्यों को सम्मानित किया गया. इस दौरान प्रो. (डॉ.) पीयूष साहनी, पूर्व प्रमुख, जीआई सर्जरी, एम्स नई दिल्ली एवं एकेडमिक डायरेक्टर, सी.एल.बी.एस., नई दिल्ली का स्वागत और सम्मान किया गया. प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता, चेयरपर्सन, सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली भी समारोह में मौजूद रहे.
संस्थापक निदेशक को किया गया सम्मानित-
समारोह में एम्स पटना के संस्थापक एवं प्रथम निदेशक प्रो. (डॉ.) गिरिश कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति रही. संस्थान की स्थापना और शुरुआती विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया गया. हाल ही में एम्स पटना से सेवानिवृत्त हुए प्रो. (डॉ.) उमेश कुमार भदानी को भी संस्थान में उनके योगदान और सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
समारोह में मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह, उप निदेशक प्रशासन नीलोत्पल बल, डीन एकेडमिक्स प्रो. (डॉ.) पूनम प्रसाद भदानी सहित वरिष्ठ चिकित्सक, फैकल्टी सदस्य, विद्यार्थी, नर्सिंग अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
15 वर्षों में बढ़ा भरोसा, अब क्षमता विस्तार की चुनौती-
एम्स पटना ने 15 वर्षों के सफर में बिहार के मरीजों के लिए कई जटिल और गंभीर बीमारियों के उपचार की सुविधा विकसित की है. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह संस्थान विशेष सहारा बना है. इलाज की बढ़ती जरूरत और प्रतिदिन 10 हजार से अधिक मरीजों की आमद ने संस्थान के विस्तार की आवश्यकता को भी स्पष्ट किया है. बेड और अन्य संसाधनों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है, लेकिन मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक, कैंसर सेंटर, एआई हब, विभागों के विस्तार और अंग प्रत्यारोपण जैसी योजनाओं के जरिए एम्स पटना अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. 15वें स्थापना दिवस पर संस्थान ने अब तक की उपलब्धियों के साथ बिहार में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और जनसेवा को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया।
