पटनासिटी, (न्यूज़ क्राइम 24) दिगम्बर जैन समाज द्वारा मनाए जा रहे दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को उत्तम आर्जव धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। इस अवसर पर हाजीगंज स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन गुरारा मंदिर तथा झाऊगंज स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन, पूजन एवं अभिषेक कर उत्तम आर्जव धर्म की आराधना की।
प्रातःकाल मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक एवं शांतिधारा की। इसके पश्चात भगवान की प्रतिमा के समक्ष जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप एवं धूप अर्पित करते हुए पूजन किया गया। जैन श्रद्धालुओं ने णमोकार मंत्र का जाप करते हुए जिनेंद्र भगवान की स्तुति एवं आराधना की। पूजा के दौरान दशलक्षण धर्म के मंत्रों एवं स्तवनों का सामूहिक पाठ भी किया गया।
मीडिया प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने बताया कि उत्तम आर्जव का अर्थ है—मन, वचन और कर्म में सरलता तथा कपट का त्याग। व्यक्ति जैसा अपने मन में सोचता है, वैसा ही उसके वचन और व्यवहार में होना आर्जव धर्म की भावना है। छल, कपट, दिखावा और मायाचारी से दूर रहकर सरल एवं निष्कपट जीवन जीना ही उत्तम आर्जव धर्म का संदेश है। दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का पर्व है, जिसमें प्रत्येक धर्म के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के विकारों को दूर करने का प्रयास करता है। मंदिरों में पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेन्द्र के समक्ष क्षमा, संयम, सत्य, सरलता और आत्मशुद्धि की भावना से धार्मिक अनुष्ठान किए। वातावरण भक्तिमय एवं धर्ममय बना रहा।
