पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) श्वेताम्बर जैन समाज के आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व का मंगलवार को बाकरगंज स्थित श्री जैन श्वेताम्बर मंदिर में भक्तिपूर्ण वातावरण के साथ समापन हुआ। पर्युषण महापर्व के समापन दिवस संवत्सरी के उपलक्ष्य में मंदिर प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर जारी रहा पूरे दिन मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना, प्रवचन एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रक्षाल, पूजा एवं प्रवचन के साथ किया गया। इस अवसर पर अहमदाबाद से पधारे काव्य भाई ने संवत्सरी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पर्युषण का आठवां दिन क्षमा याचना एवं क्षमा प्रदान करने का दिवस है। उन्होंने उल्लेख किया कि व्यक्ति को अपने अंतर्मन से द्वेष की भावना का त्याग करना चाहिए तथा दूसरों के मन में निहित कटुता को दूर करने का सार्थक प्रयास करना चाहिए। संवत्सरी आत्मचिंतन के माध्यम से पारस्परिक मतभेदों को समाप्त कर मैत्री एवं सद्भावना स्थापित करने का संदेश प्रदान करती है। संध्याकाल में मंदिर परिसर में सामूहिक संवत्सरी प्रतिक्रमण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। प्रतिक्रमण के दौरान उपस्थित जनसमूह ने वर्षभर में अनजाने में हुई त्रुटियों का आत्मावलोकन किया तथा प्रभु के समक्ष क्षमा याचना की।
समाज के श्री पंकज भाई कोठारी ने संवत्सरी प्रतिक्रमण के विशेष महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैन धर्म में यह पर्व आत्मशुद्धि और आत्मावलोकन का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे वर्ष के दौरान अनजाने में किसी भी जीव को मन, वचन या काया से हुई पीड़ा के लिए इस दिन सामूहिक प्रतिक्रमण के माध्यम से क्षमा याचना की जाती है। श्री भरतभाई मेहता ने कहा कि यह पर्व मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अहंकार एवं द्वेष त्यागकर सभी जीवों के प्रति मैत्री और करुणा का भाव जागृत करने का माध्यम है। यह व्यक्ति को अपनी भूलों को स्वीकार करने हेतु प्रेरित करता है। सामूहिक प्रतिक्रमण के उपरांत श्रद्धालुओं ने परस्पर क्षमा भाव व्यक्त करते हुए “मिच्छामि दुक्कड़म्” का उच्चारण किया। इसके साथ ही अहिंसा, मैत्री और सद्भाव के संदेश के साथ आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व का विधिवत समापन हुआ।
