पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) सही साक्ष्य, वैज्ञानिक जांच और न्याय की मजबूत नींव।इन्हीं उद्देश्यों के साथ एम्स पटना के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने शनिवार, 22 अगस्त 2026 को पुलिस उपाधीक्षकों के पहले बैच के लिए आधे दिन का मेडिको लीगल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर के समन्वय से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल का अनुमोदन एवं मार्गदर्शन प्राप्त था। कार्यक्रम में 34 वरिष्ठ पुलिस उपाधीक्षक अधिकारियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का फोकस केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा बल्कि पुलिस अधिकारियों को यह समझाने पर रहा कि मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य किस तरह किसी जांच की दिशा और परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को इंक्वेस्ट, मृत्यु के बाद होने वाले शारीरिक बदलाव, पोस्टमार्टम की वैज्ञानिक प्रक्रिया, साक्ष्यों के संग्रह एवं संरक्षण, जैविक नमूनों की हैंडलिंग तथा एफएसएल में उनके विश्लेषण सहित कई महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए पोस्टमार्टम प्रक्रिया का वीडियो प्रदर्शन भी किया गया। इससे अधिकारियों को यह समझने में मदद मिली कि पोस्टमार्टम के दौरान प्राप्त मेडिकल निष्कर्ष जांच में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस उपाधीक्षक अधिकारियों ने एम्स पटना के नव स्थापित उन्नत फोरेंसिक म्युजियम और आधुनिक शवगृह परिसर का भी दौरा किया। अधिकारियों को फॉरेंसिक मेडिसिन में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक सुविधाओं, प्रक्रियाओं और उनके व्यावहारिक महत्व से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम में आयोजित विशेष इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में पुलिस अधिकारियों ने जांच के दौरान सामने आने वाली विभिन्न मेडिको लीगल और फॉरेंसिक चुनौतियों को साझा किया। विशेषज्ञों ने उनके सवालों का जवाब देते हुए साक्ष्य संग्रह, पोस्टमार्टम निष्कर्ष, दस्तावेजीकरण और फॉरेंसिक रिपोर्ट की समझ से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम में अधिकारियों को UMID प्रोजेक्ट के बारे में भी जानकारी दी गई। एफएमटी विभाग द्वारा एम्स नई दिल्ली और आईसीएमआर के सहयोग से संचालित इस शोध परियोजना का उद्देश्य अज्ञात एवं पहचान न हो पाने वाले मृत व्यक्तियों का राष्ट्रीय डेटा बैंक तैयार करना है।
इस परियोजना में मृत व्यक्तियों के शारीरिक पहचान संबंधी विवरण के साथ डीएनए प्रोफाइलिंग को शामिल किया जा रहा है। यह पहल भविष्य में अज्ञात शवों की पहचान करने और पुलिस जांच को वैज्ञानिक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रशिक्षण का संचालन डॉ. अमित पाटिल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एफएमटी विभाग, के साथ प्रो. डॉ. बिनय कुमार, डॉ. अशोक रस्तोगी, डॉ. तोशल वानखेड़े और डॉ. चैतन्य मित्तल ने किया। विभाग के वरिष्ठ एवं जूनियर रेजिडेंट्स ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग दिया।
यह तीन प्रस्तावित प्रशिक्षण सत्रों में पहला सत्र था। पुलिस उपाधीक्षक अधिकारियों के दो अन्य बैचों के लिए भी आगामी सत्रों में मेडिको लीगल प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। एम्स पटना और बिहार पुलिस अकादमी की यह संयुक्त पहल मेडिकल साइंस और कानून व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे प्रशिक्षण से पुलिस अधिकारियों को फॉरेंसिक साक्ष्यों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और वैज्ञानिक, साक्ष्य आधारित तथा प्रभावी जांच के माध्यम से न्याय की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा सकेगा।
