बिहार

सूबे के शहरी क्षेत्रों में 598 स्वास्थ्य केंद्रों को मिली मंजूरी, मात्र 2 रुपये में होगा इलाज

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार के शहरी क्षेत्रों और खासकर स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और मजबूत करने जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में कुल 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संचालन को भारत सरकार से स्वीकृति मिल गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिला पदाधिकारियों और सिविल सर्जनों को आगामी 31 अगस्त 2026 तक इन केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मात्र दो रुपये का कटेगा पर्चा, इलाज मुफ्त इन नए स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को सभी स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह मुफ्त दी जाएंगी। ओपीडी में दिखाने के लिए मरीजों को मात्र 2 रुपये का पर्चा (सुविधा शुल्क) कटवाना होगा। यह दो रुपये की राशि जन आरोग्य समिति के बैंक खाते में जमा की जाएगी, जिससे केंद्र का ही विकास होगा। लोगों की सहूलियत के लिए यूपीएचसी में ओपीडी का समय सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक रहेगा, जबकि यूएचडब्ल्यूसी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे।

पटना स्मार्ट सिटी के 11 जन सेवा केंद्रों में भी खुलेंगे वेलनेस सेंटर :

राजधानी पटना के लोगों के लिए एक विशेष पहल की गई है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत पटना में संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को भी अब शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में संचालित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार से इन 11 केंद्रों के संचालन को भी हरी झंडी मिल चुकी है।

मिलेगी 12 तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं :

यूपीएचसी पर मुख्य रूप से ओपीडी, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, परामर्श, संचारी व गैर-संचारी रोगों की जांच और मुफ्त दवा वितरण सहित 12 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध होंगी। स्लम बस्तियों के लोगों तक सीधे लाभ पहुंचाने के लिए विशेष दूरस्थ स्वास्थ्य शिविर और आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में भी खुलेंगे सेंटर :

युवाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शहरी निकाय क्षेत्र में आने वाले 19 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और 14 राजकीय अभियंत्रण (इंजीनियरिंग) महाविद्यालयों में भी यूएचडब्ल्यूसी का संचालन किया जा रहा है, जिन्हें केंद्र सरकार से स्वीकृति मिल गई है।

किराये के भवनों में भी होगी शुरुआत :

इन केंद्रों की स्थापना शहरी स्लम आबादी के आसपास की जानी है। इसके लिए सरकारी भवनों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन सरकारी भवन उपलब्ध न होने की स्थिति में निजी मकान किराये पर लिए जा सकेंगे। भवन भू-तल (ग्राउंड फ्लोर) पर होना चाहिए जिसमें 4-5 कमरे हों और महिला-पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था हो। यूपीएचसी के लिए अधिकतम 25 हजार रुपये और यूएचडब्ल्यूसी के लिए 10 हजार रुपये प्रतिमाह किराये का प्रावधान किया गया है।

‘शहरी आशा’ और महिलाओं की होगी अहम भागीदारी :

शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने के लिए ‘शहरी आशा’ का चयन किया जाएगा। इसके अलावा, स्वयं सहायता समूहों की तर्ज पर ‘महिला आरोग्य समिति’ का गठन किया जाएगा, जिससे स्वास्थ्य के प्रति सामुदायिक जागरूकता और सहभागिता बढ़ाई जा सके। जब तक स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक विभागीय निर्देशानुसार रोस्टर के आधार पर एक एमबीबीएस चिकित्सक और आवश्यकतानुसार एएनएम/स्टाफ नर्स की प्रतिनियुक्ति सिविल सर्जन द्वारा की जाएगी।

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