फुलवारीशरीफ, अजीत। आपदा के समय त्वरित और समन्वित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एम्स पटना में शुक्रवार को ‘भिष्म क्यूब’ को लेकर टेबलटॉप अभ्यास आयोजित किया गया. इस दौरान 22 अगस्त को रोहतास के करमचट बांध में प्रस्तावित पूर्ण पैमाने की बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल की तैयारियों की समीक्षा की गई और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की रणनीति पर चर्चा हुई।
अभ्यास में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. प्रतिभागियों को ‘भिष्म क्यूब’ की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई और बताया गया कि आपदा या सामूहिक दुर्घटना की स्थिति में गंभीर घायलों के उपचार में यह प्रणाली किस प्रकार प्रभावी साबित हो सकती है. विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और समन्वय तंत्र पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
एम्स पटना के ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं ‘भिष्म क्यूब’ कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने काल्पनिक आपदा परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि ऐसी स्थिति में संसाधनों का प्रबंधन, घायलों का उपचार, सुरक्षित निकासी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल कैसे सुनिश्चित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी और समन्वय सबसे महत्वपूर्ण है।
बैठक में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, बिहार पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, एयरपोर्ट अथॉरिटी तथा एम्स पटना सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि समय पर समन्वित कार्रवाई का विषय है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रस्तावित मॉक ड्रिल के सफल संचालन के लिए एम्स पटना हर स्तर पर तकनीकी और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराएगा। बैठक के अंत में सभी सहभागी एजेंसियों ने 22 अगस्त को करमचट बांध में प्रस्तावित बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल के सफल आयोजन और बिहार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
