फुलवारीशरीफ, अजित। बिहार की महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने, विभिन्न बीमारियों की सही जानकारी उपलब्ध कराने तथा समय पर उचित इलाज और परामर्श दिलाने के उद्देश्य से ‘सहेली’ अध्ययन समूह ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. यह समूह महिलाओं को यह जानकारी उपलब्ध कराने का कार्य करेगा कि किस बीमारी के कौन से लक्षण हैं, किस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, किस प्रकार का उपचार उपलब्ध है और इलाज के लिए कहां जाना चाहिए।
महिलाओं को जीवन के विभिन्न चरणों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं और स्त्री रोग संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में ‘सहेली’ अध्ययन समूह महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाने, स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी उपलब्ध कराने तथा आवश्यक परामर्श देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. समूह का उद्देश्य महिलाओं को गर्भाशय संबंधी रोगों, अत्यधिक रक्तस्राव, हार्मोन संबंधी समस्याओं, संक्रमणजनित बीमारियों तथा अन्य स्त्री रोगों के प्रति जागरूक बनाना है।
बिहार में महिला रोगियों की बढ़ती संख्या और स्त्री रोग संबंधी बीमारियों के मामलों को देखते हुए अध्ययन समूह ने महिलाओं को रोगों से बचाव, समय पर जांच, उचित उपचार तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया है. इसके साथ ही महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त करने में भी सहायता की जाएगी।
इसी उद्देश्य को लेकर शनिवार को एम्स पटना में डीबीटी-वेलकम इंडिया एलायंस द्वारा वित्तपोषित ” सहेली ” अध्ययन समूह के अंतर्गत “बिहार में स्त्री रोग स्वास्थ्य में सुधार एवं हिस्टरेक्टॉमी के विवेकपूर्ण उपयोग” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में राज्य और देश के कई प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञों, स्वास्थ्य अधिकारियों तथा चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
बैठक का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. राजू अग्रवाल ने किया. उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि अनावश्यक हिस्टरेक्टॉमी ऑपरेशन को रोकना और महिलाओं को वैकल्पिक उपचार उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. नीरजा भाटला, पूर्व विभागाध्यक्ष एम्स नई दिल्ली तथा डॉ. अशोक कुमार, निदेशक राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर ही बेहतर परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि अनावश्यक सर्जरी की जरूरत न पड़े।
बैठक के दौरान बिहार में हिस्टरेक्टॉमी से संबंधित अध्ययन के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए तथा महिलाओं के लिए उपलब्ध वैकल्पिक उपचार, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी, चिकित्सा ऑडिट और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
एम्स पटना के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष तथा ” सहेली ” अध्ययन की सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. मुक्ता अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं को अत्यधिक मासिक रक्तस्राव सहित अन्य सामान्य स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए उच्च गुणवत्ता वाले विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि आवश्यकता नहीं होने पर उन्हें हिस्टरेक्टॉमी का सहारा न लेना पड़े। बैठक में बिहार के प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, जागरूकता बढ़ाने तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए गए।
