बिहार

‘मीनू’ का मंचन : बचपना की वजह से टूटा ससुराल से नाता

फुलवारीशरीफ, अजित। अपनी स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष के शुभारम्भ पर मंथन कला परिषद ने रविवार को हिंदी नाटक ‘मीनू’ का मंचन किया। यह नाटक कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी ‘समाप्ति’ पर आधारित है। वरिष्ठ रंगकर्मी व बिहार संगीत नाटक अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में इसका मंचन एस. एफ. स्टूडियो, नौबतपुर में किया गया। नाटक की कहानी गांव की एक भोली-भाली लड़की मीनू के इर्द-गिर्द घूमती है। उसका बचपना वयस्क होने के बाद भी बरकरार रहता है। गांव के ही युवक अपूर्व से शादी होने के बाद भी वह बच्चों के साथ ही अधिक समय बिताती है.* ससुराल में आने के बाद भी उसका बाल सुलभ व्यवहार जारी रहता है, जो उसकी सास को पसंद नहीं आता है। इसी कारण मां और पुत्र के बीच अनबन शुरू हो जाती है।

अपूर्व इस स्थिति से परेशान होकर मीनू को मायके में छोड़कर कलकत्ता चला जाता है। दोनों अलग-अलग रहने का निर्णय लेते हैं। कुछ समय बाद मीनू के भीतर ससुराल और पति के प्रति सहज आकर्षण जागने लगता है.* वह खुद को खोई-खोई महसूस करती है और बच्चों के साथ खेलने में भी उसका मन नहीं लगता है। अपूर्व की याद उसे लगातार सताने लगती है। आखिरकार एक दिन वह अचानक अपने ससुराल पहुंच जाती है.* वहां वह अपनी सास और नौकर काका दयाल से माफी मांगती है.* नाटक का समापन सुखद और रोचक मोड़ पर होता है, जब नाटकीय अंदाज में अपूर्व और मीनू का पुनर्मिलन होता है।

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नाटक में मां की भूमिका में अंजली शर्मा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। मीनू की भूमिका में काजल कुमारी, ननद के रूप में पूजा कुमारी, काका दयाल के रूप में सोनू कुमार, अपूर्व के रूप में रोहन राज, तथा नीरज कुमार, हौविन्स कुमार, दीनानाथ गोस्वामी ने प्रभावी अभिनय किया। बाल कलाकार हार्दिक वर्मा और लिपी वर्मा ने भी अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को प्रभावित किया। मंच व्यवस्था अमन कुमार, संगीत संयोजन प्रीतम कुमार, श्यामाकांत और रंजित दास, तथा प्रकाश परिकल्पना सोनू कुमार द्वारा की गई, जिसने नाटक को और अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बना दिया।

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