बिहार

फुलवारी शरीफ में नन्हे रोज़ेदारों की मिसाल, नया टोला और हारूननगर में बच्चों ने रखा पहला रोज़ा

फुलवारीशरीफ, अजीत। मुक़द्दस माह-ए-रमज़ान के पहले जुमे के मौके पर जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में मशगूल रहे, वहीं फुलवारी शरीफ के अलग-अलग इलाकों में दो नन्हे बच्चों ने रोज़ा रखकर मिसाल पेश की है. नया टोला इलाके में पांच साल की उरूज आफताब ने अपना पहला रोज़ा रखा, तो हारूननगर सेक्टर–2 में सात साल के मोहम्मद हनज़ल हुसैन ने रमज़ान के पहले जुम्मे का रोज़ा रखकर सभी का दिल जीत लिया. दोनों परिवारों में इस मौके पर खुशी और गर्व का माहौल रहा।

नया टोला की उरूज आफताब ने रखा पहला रोज़ा-

फुलवारी शरीफ के नया टोला की रहने वाली पांच साल की उरूज आफताब ने इस साल अपना पहला रोज़ा रखा और पूरे दिन सब्र और हिम्मत के साथ उसे मुकम्मल किया. सुबह सहरी के वक्त वह परिवार के साथ उठीं, सहरी की और रोज़े की नियत की. घर के लोगों को शुरुआत में भरोसा नहीं था कि इतनी छोटी बच्ची पूरा रोज़ा रख पाएगी, लेकिन उरूज ने बिना किसी शिकायत के दिनभर रोज़ा रखा.

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शाम को इफ्तार के वक्त पूरा परिवार एक साथ बैठा. उरूज आफताब ने खजूर खाकर अपना पहला रोज़ा खोला. घर का माहौल भावुक और खुशनुमा हो गया. सभी ने उसे दुआओं और आशीर्वाद से नवाजा। उरूज आफताब फुलवारी नगर परिषद के पूर्व वार्ड पार्षद मो. कौसर खान की पोती हैं. उनकी दादी अलीमून निशा भी पूर्व वार्ड पार्षद रह चुकी हैं. उनके पिता इंजीनियर आफताब आलम राजद के जिला उपाध्यक्ष हैं और माता जेबा आफरीन पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं. परिवार में रजिया कौसर मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं. एक अन्य पुत्री इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही हैं. शहबाज आलम इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. एलकेजी में पढ़ने वाली उरूज ने कम उम्र में ही धार्मिक संस्कारों की मिसाल पेश की है। इफ्तार के बाद पूरे परिवार ने मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी. स्थानीय लोगों ने भी उरूज के उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की।

हारूननगर के मोहम्मद हनज़ल हुसैन ने रखा पहला जुम्मे का रोज़ा-

फुलवारी शरीफ के हारूननगर सेक्टर–2 निवासी सात साल के मोहम्मद हनज़ल हुसैन ने रमज़ान के पहले जुम्मे का रोज़ा रखकर मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गए. कम उम्र में रोज़ा रखकर उन्होंने अल्लाह की रज़ा के लिए इबादत की और शाम तक सब्र के साथ रोज़ा पूरा किया। उनकी अम्मी जीनत तबस्सुम ने बताया कि बेटे ने सात साल की उम्र में रोज़ा रखकर परिवार को गर्व का मौका दिया है. उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही रोज़ा, नमाज़ और दीनी तालीम की आदत डालनी चाहिए, ताकि उनमें अच्छे संस्कार विकसित हों। इफ्तार के वक्त घर में खुशी का माहौल रहा. परिवार और मोहल्ले के लोगों ने हनज़ल की हौसला अफ़ज़ाई की और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआ की। रमज़ान के इस पाक महीने में नया टोला और हारूननगर के इन दोनों नन्हे रोज़ेदारों ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो उम्र मायने नहीं रखती. फुलवारी शरीफ में दोनों बच्चों की इस पहल की सराहना हो रही है और लोग इसे प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं।

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