बिहार

सीमांचल के महान चित्रकार नारायण सिंह का निधन

अररिया, रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड के मधुरा उत्तर सिंह टोला निवासी ने अपने एक महान सपूत को खो दिया। वरिष्ठ चित्रकार 85 वर्षीय नारायण सिंह का निधन हो गया है। वे स्वतंत्रता सेनानी एवं चित्रकार विश्वनाथ सिंह के पुत्र थे और पिछले कई दशकों से अपनी कला के माध्यम से बिहार की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर रहे थे। उनका निधन शनिवार के अहले सुबह करीब 9 बजे अपने निज आवास पर हुआ। उन्होंने अपने पीछे, पत्नी, तीन पुत्र, एक बेटी और पोता पोती, नाती सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए है।

पिता विश्वनाथ सिंह स्वतंत्रता सेनानी तथा चित्रकार थे। नारायण सिंह ने अपने जीवन को चित्रकारी के लिए समर्पित किया। उनकी पेंटिंग्स ने न केवल अररिया बल्कि पूरे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर में पहचान बनाई। उनकी कला में आंचलिक जीवन, संघर्ष और सामाजिक संदेश गहराई से झलकते थे।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया। उनकी कलाकृतियाँ कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हुईं। विशेष रूप से कोसी नदी की मानवीकृत छवि वाली पेंटिंग ने लोगों का ध्यान खींचा। इसमें कोशी को विनाशकारी शक्ति और साथ ही मां के रूप में दिखाया गया था।

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80 वर्ष से अधिक आयु में भी वे कला साधना में लगे रहे। कुछ समय पहले हुई दुर्केघटना के बाद वे बैसाखी का सहारा लेते थे। तमाम उपलब्धियों के बावजूद वे गुमनामी में जीवन जी रहे थे। आज उनके निधन से सीमांचल और बिहार की कला जगत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।

नारायण सिंह की पेंटिंग्स आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। वे सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि सीमांचल की आत्मा को रंगों में उतारने वाले सृजनकर्ता थे। उनके देहांत की खबर सुनकर नरपतगंज विधायक देवंती यादव, तंजील अहमद झुन्नू, धर्मेंद्र बोथरा, गब्बर सिंह, आशुतोष वर्मा, रमेश मंडल सहित सैकड़ों गणमान्य लोग परिजनों सांत्वना देने आए तथा अंतिम यात्रा में उपस्थित रहे। भांजा राजीव सिंह ने बताया कि भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष रणधीर सिंह के पिता नारायण सिंह का जन्म मथुरा उत्तर सिंह टोला में हुआ था वह एक आदर्शवादी व्यक्ति थे।

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