बिहार

मदर्स इंटरनेशनल अकादमी में पितृ प्रेम की बयार, बच्चों ने बांधा समां

फुलवारीशरीफ, अजित। मदर्स इंटरनेशनल अकादमी, पटना के भव्य सभागार में शनिवार को ‘पितृ दिवस’ धूमधाम से मनाया गया और माहौल ऐसा बना मानो खुद खुशियाँ बच्चों की हथेलियों में उतर आई हों. पिता और बच्चों के रिश्ते की वो मासूम, मजबूत और भावनात्मक डोर कार्यक्रम की हर प्रस्तुति में झलकती रही।

पिता की मुस्कान, बच्चों की धमाल और सभागार में तालियों की गूंज ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया. बच्चों ने स्वागत गान से लेकर अंग्रेज़ी-हिंदी भाषण, कविताएँ, नृत्य और गेम्स तक ऐसी प्रस्तुतियाँ दीं कि पिताओं की आँखें खुशी से नम हो गईं।

इनायत, हयात, हर्षिता, आशिया, कनक, अलिशा, तैयबा, अराध्या, वैष्णवी, वन्या, वारदा, सफा, अतीफा, अनुष्का, प्रेरणा, फातिमा, जोया, प्रिया, अदीबा, आरव, अदनान, ओमैर, असद, मुज़्तबा, सक्षम, असीम, आसिफ, आहिल जफर, कबीर दिवान, अबू हमज़ा, ऐयान खान, शाबिक, शाबिर खान, दिव्यांश राय, आबुश अंजुम, अकिफ़ा मरियम, राधा, आयेशा परवीन, नाबीद, आरिश, माज, काशिफ, अल्तमश सहित अन्य बच्चों की प्रस्तुतियाँ एक से बढ़कर एक रहीं.

कहीं कविता में पिता छाँव बनकर उभरे तो कहीं अभिनय में वो बन गए घर की चुपचाप रीढ़. बच्चों ने बता दिया कि उनके लिए पापा सिर्फ ATM नहीं, इमोशन हैं, इंस्पिरेशन हैं, और सबसे बड़े सुपरहीरो हैं.

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निदेशक अरशद अहमद ने कहा कि “पिता सिर्फ कमाने वाला नहीं, परिवार की ढाल होता है. बच्चों के हर डर के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ा रहता है।

प्राचार्या सुप्रिया चटर्जी ने पिताओं को सम्मानित किया और कहा कि “फादर्स डे केवल एक दिन नहीं, एक एहसास है. यह दिन उन नायकों के लिए है, जो अपने ख्वाबों को बच्चों की हँसी में बदल देते है।

कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि पितृत्व कोई औपचारिक रिश्ता नहीं, एक अनकही कविता है जो हर दिन बच्चों की आँखों में पढ़ी जा सकती है. तालियों की गूंज और हर्षोल्लास के बीच यह पितृ दिवस सभी के दिलों में यादगार बनकर बस गया।

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