बिहार

दुर्लभ बीमारी से पीड़ित 2 साल का मासूम बच्चा “मास्टर तेजस रंजन” को मदद की दरकार

पटना, अजीत। पटना के गौरीचक के बरावा गांव का रहने वाला 2 साल का मासूम बच्चा मास्टर तेजस रंजन जानलेवा दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप- II से पीड़ित है . उसे जान बचाने के लिए काफी महंगी दवाई ज़ोलगेन्स्मा, रिसडिप्लम “की जरूरत है, जिसकी कीमत साढ़े सत्रह करोड़ रूपए है. गुजरात के सूरत में यूको बैंक में ब्रांच मैनेजर मास्टर तेजस रंजन के पिता प्रशांत रंजन बच्चों व पत्नी को लेकर फिलहाल अपने ससुराल पटना के राम कृष्ण नगर थाना के सोरंगपुर में आए हुए हैं. उनके ससुर राम प्रवेश प्रसाद सीआईडी से रिटायर्ड इंस्पेक्टर रहे हैं.मास्टर तेजस रंजन के अलावा प्रशांत रंजन को एक सात साल बेटा मानस भी है . वही इस जानलेवा दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त मासूम मास्टर तेजस रंजन को बचाने के लिए परिजन लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं. मास्टर तेजस रंजन की मां अर्चना कुमारी भी लोगों से बेटे को बचाने के लिए जरूरी दवाई की खरीद के लिए मदद की गुहार लगा रही है . परिवार वालों का कहना है कि सरकार से जो मदद की राशि मिलती है उससे इस बच्चे के जान बचाने के लिए जरूरी दवाई नहीं खरीदी जा सकती है.

मास्टर तेजस रंजन के पिता प्रशांत रंजन ने बताया कि वह अपने बेटे को लेकर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल से दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल समेत कई अस्पतालों में दिखला चुके हैं.उन्होंने बताया की
अपने छोटे बेटे मास्टर “तेजस रंजन” के स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप- II से पीड़ित होने की जानकारी मिलते ही परेशान हो गया.यह जानलेवा दुर्लभ बीमारी है. एसएमए प्रकार के आनुवंशिक विकार वाले व्यक्तियों में एसएमएन 1 प्रोटीन की कमी होती है, जो मोटर न्यूरॉन्स के अस्तित्व और कार्यक्षमता के लिए आवश्यक होते हैं. मोटर न्यूरॉन्स, जो अंग क्रिया के लिए जिम्मेदार हैं. मास्टर तेजस रंजन न तो स्वतंत्र रूप से खड़े हो पा रहे हैं और न ही अपना हाथ ऊपर उठा पा रहे हैं. लक्षणों के देर से प्रकट होने की जांच की गई और निदान से मास्टर तेजस रंजन के लिए एसएमए टाइप II का पता चला. मेरा पूरा परिवार पीड़ा और कंपकंपी के डर में जी रहा है क्योंकि हमें पता चला है कि अगर मैंने ईस बीमारी का इलाज नहीं किया, तो गतिविधि बंद होने के कारण उसकी जान जा सकती या पूरा जीवन खुद की उसकी हर कार्य करने की निर्भरता खत्म होती जा रही है.हर नया दिन हमें डरा देता है, हमारा दिमाग इस विचार से थक जाता है कि हर दिन मेरे बच्चे में बीमारी बढ़ रही है.माता पिता बताते हैं की हमने सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली और एम्स दिल्ली से जेनेटिक काउंसलिंग प्राप्त की है. अब तक हमने जो जानकारी एकत्र की है उसमे केवल कुछ दवाएं ही भारत में विशेष मांग पर उपलब्ध हैं.उन दवाओं का भारत में निर्मित और विपणन नहीं किया जाता है (केवल आयातित) और जीवन रक्षक दवाओं में से एक ज़ोलगेन्स्मा, रिसडिप्लम है. दोनों दवाएं बहुत महंगी हैं. व्यक्तिगत स्तर पर सस्ती नहीं हैं जबकि ज़ोगेन्स्मा एक जीन थेरेपी है जो एसएमए बच्चों के इलाज के लिए उपलब्ध है. इस दवाई की कीमत रु 14.50 करोड़ से 17.50 करोड़ (एक बार) है. रिसडिप्लम एक मौखिक दवा जिसकी कीमत 12.50 लाख प्रति खुराक 85 दिनों के लिए (जीवन भर लेने की आवश्यकता है).जो करीब 16-18 करोड़ है. इस दवाई की अस्पताल द्वारा विशेष रूप से ऑडर भेजा जाता है .

बच्चे के पिता प्रशांत रंजन बताते है की परिवार का मुखिया होने के नाते, मेरे लिए (व्यक्तिगत रूप से) इतनी बड़ी राशि की चिकित्सा/उपचार की व्यवस्था करना असंभव है. एक दुखी पिता होने के नाते, मैं सभी से अनुरोध कर रहा हूं कि मेरे बेटे की जिंदगी बचाने के लिए अपनी मेहनत की कमाई का एक छोटा सा हिस्सा योगदान दें. आपका छोटा सा योगदान उसके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है.

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आप तेजस खाते में सीधे निम्नानुसार राशि भेज सकते हैं:-
खाता संख्या: 03450110099452
खाता नाम: तेजस रंजन
आईएफएससी कोड: UCBA0000345


तेजस आपके छोटे से योगदान से इस जीवन चुनौती को जीत सकता है. कृपया उसे बचा लीजिये।

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