बिहार

विश्व टीबी दिवस : हर सांस की सुरक्षा, हर मरीज का भरोसा

पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) विश्व टीबी दिवस के अवसर पर मंगलवार को एम्स पटना के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग द्वारा एक मरीज केंद्रित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहाँ जानकारी के साथ साथ विश्वास, संवाद और संवेदना को भी समान महत्व दिया गया। यह कार्यक्रम केवल बीमारी के बारे में बताने तक सीमित नहीं रहा बल्कि मरीजों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास था कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं।

कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दीपेन्द्र कुमार राय ने मरीजों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि टीबी एक बीमारी जरूर है लेकिन यह आपकी पहचान नहीं है। सही समय पर जांच और पूरा इलाज इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। उन्होंने मरीजों को सरल शब्दों में समझाया कि यदि लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना या रात में पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर की गई बलगम जांच और आधुनिक टेस्ट से टीबी का पता जल्दी और सटीक लगाया जा सकता है।

डॉ. राय ने उपचार को “धैर्य और अनुशासन की साझी यात्रा” बताते हुए कहा कि कम से कम 6 महीने तक नियमित दवा लेना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीच में दवा छोड़ना बीमारी को और जटिल बना सकता है और ड्रग रेसिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ा देता है। मरीजों के मन से डर और आर्थिक चिंता दूर करते हुए उन्होंने आश्वस्त किया कि टीबी का पूरा इलाज सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत हर मरीज को प्रति माह ₹500 की सहायता दी जाती है ताकि वे पौष्टिक आहार लेकर जल्दी स्वस्थ हो सकें।

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कार्यक्रम की खास बात रही सीधा संवाद और सहभागिता, जहाँ मरीजों और उनके परिजनों ने खुलकर अपने सवाल पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस संवाद ने मरीजों के मन में भरोसा और सकारात्मकता का संचार किया। संक्रमण से बचाव के सरल उपायों जैसे मास्क का उपयोग, खांसते समय मुंह ढकना और हवादार वातावरण में रहने को भी व्यवहारिक तरीके से समझाया गया ताकि मरीज अपने दैनिक जीवन में इन्हें आसानी से अपना सकें।

कार्यक्रम के दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक क्षण तब आया जब सभी उपस्थित लोगों ने एक साथ यह संकल्प लिया कि “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” यह संकल्प केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर मरीज के स्वस्थ भविष्य और एक टीबी-मुक्त समाज की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बना। अंत में मरीजों को जागरूकता सामग्री प्रदान की गई जिससे वे सही जानकारी के साथ अपने उपचार की यात्रा को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा सकें। यह पहल न केवल जानकारी देने का माध्यम बनी, बल्कि मरीजों के मन में विश्वास, साहस और उम्मीद जगाने की एक सशक्त कोशिश भी साबित हुई क्योंकि हर मरीज की मुस्कान ही इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता है।

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