पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) बिहार में संख्या के आधार पर हर साल 35 लाख महिलाएं गर्भवती होती है और उनसे लगभग 30 लाख से अधिक बच्चों का जन्म होता है। गर्भावस्था के बाद से बच्चों के जन्म के बाद तक बेहतर चिकित्सकीय जांच और इलाज नहीं करवाने के कारण हर साल लगभग 03 हजार 750 स्व अधिक गर्भवती महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। बिहार में मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का संचालन किया जा रहा है। संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए प्रमंडलीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्रीय उपनिदेशक स्वास्थ्य (आरएडी) डॉ सरवन कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रमंडल के चारों जिलों के जिला एवं प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन होटल आदित्य, खुश्कीबाग पूर्णिया में आयोजित किया गया।
इस दौरान यूनिसेफ के राज्य सलाहकार मातृ स्वास्थ्य शेख वाहिद अली और जिला सलाहकार शिवशेखर आनंद द्वारा सभी अधिकारियों को मातृ मृत्यु नियंत्रण के लिए गंभीर और अतिगंभीर गर्भवती महिलाओं की पहचान करते हुए उन्होंने चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने और प्रसव के बाद मृत्यु होने पर संबंधित महिलाओं की जानकारी एकत्रित करते हुए अन्य लोगों को इससे सुरक्षित रखने के लिए विशेष ध्यान रखने हेतु आवश्यक जानकारी दिया गया। इस दौरान आरपीएम कैशर इकबाल, सभी जिले के सिविल सर्जन, एसीएमओ, डीएमई, डीसीएम, अस्पताल अधीक्षक, अस्पताल प्रबंधक, प्रखंड स्वास्थ्य अधिकारी और प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक उपस्थित रहे।
प्रसव के बाद 42 दिनों में हुई मृत्यु को जोड़ा जाता है मातृ मृत्यु में, अधिकारियों द्वारा करना है उसका समीक्षा:
प्रशिक्षण में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय उपनिदेशक स्वास्थ्य (आरएडी) डॉ सरवन कुमार ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी प्रखंड में स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किया गया है। इसके अनुसार किसी क्षेत्र में 15 से 49 वर्ष की गर्भवती महिला जिसकी मृत्यु गर्भावस्था के बाद से प्रसव के उपरांत भी 42 दिन बाद तक हो जाती है उन्हें मातृ मृत्यु की श्रेणी में जोड़ते हुए उनका मूल्यांकन करना आवश्यक है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित प्रखंड के स्वास्थ्य अधिकारियों को टीम बनाकर उनका मूल्यांकन करते हुए संबंधित रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके साथ साथ संबंधित क्षेत्र में ऐसे अवस्था में उपलब्ध गर्भवती महिलाओं की पहचान करते हुए उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना चाहिए ताकि आगे से ऐसी अवस्था में गर्भवती महिलाओं की मृत्यु को नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्र में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है ताकि संबंधित क्षेत्र में मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित रखा जा सके।
अप्रैल से जून 2024 में पूर्णिया प्रमंडल में दर्ज हुए हैं 17 मातृ मृत्यु :
यूनिसेफ से मातृ स्वास्थ्य के राज्य सलाहकार शेख वाहिद अली ने कहा कि मातृ मृत्यु दर की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोर्टल बनाया गया है जिसमें प्रखंड के साथ साथ जिला राज्य और केंद्र स्वास्थ्य विभाग द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके लिए सभी प्रखंड को संबंधित पोर्टल का आईडी और पासवर्ड दिया गया है। संबंधित अधिकारियों द्वारा अपने क्षेत्र में होने वाले मातृ मृत्यु संबंधित सभी जानकारी स्थानीय आशा और एएनएम से प्राप्त करते हुए उसका सुनिश्चित समय के भीतर मूल्यांकन सुनिश्चित करना आवश्यक है। उसके बाद संबंधित रिपोर्ट पोर्टल पर जोड़ा जाना है जिसे जिला स्तरीय टीम द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी उसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित क्षेत्र के स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी का मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून 2024 तक में पूर्णिया प्रमंडल में 17 मातृ मृत्यु दर्ज किया गया है जिसमें से अररिया में 03, कटिहार में 08, किशनगंजके 04 और पूर्णिया में 02 मातृ मृत्यु पाया गया है। ऐसे मातृ मृत्यु के बाद संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा उसका मूल्यांकन करते हुए उसका रिपोर्ट भी पोर्टल पर जोड़ना आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा उस क्षेत्र में ऐसी मृत्यु को रोका जा सके।
मातृ मृत्यु को रोकने के लिए एएनसी जांच जरूरी, गंभीर महिला की पहचान कर पहुँचाया जाएगा बेहतर चिकित्सा :
यूनिसेफ जिला सलाहकार शिवशेखर आनंद ने बताया कि मातृ मृत्यु दर को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) कराना जरूरी है। इससे गर्भावस्था के दौरान गंभीर गर्भवती महिलाओं की पहचान करते हुए उन्हें बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सकेगी और मातृ मृत्यु को रोका जा सकेगा। उन्होंने बताया कि गंभीर गर्भवती महिलाओं में पोर्टल में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर अप्रैल से जून 2024 में कटिहार में 6.8 प्रतिशत, किशनगंज में 4.0 प्रतिशत, अररिया में 3.7 प्रतिशत और पूर्णिया में 3.6 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को गंभीर अवस्था में पाया गया है जिन्हें चिकित्सकों द्वारा चिकित्सकीय सहायता प्रदान करते हुए सुरक्षित किया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में अन्य गर्भवती महिलाओं की पहचान करते हुए भी उन्हें नियमित एएनसी जांच करवाने के लिए जागरूक करते हुए चिकित्सकीय जांच करवाना सुनिश्चित करना चाहिए जिससे कि मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सके।
