अररिया, रंजीत ठाकुर। नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय स्थित अस्पताल चौक के समीप एक निजी अस्पताल में शनिवार की रात्रि आपरेशन के बाद जच्चा बच्चा की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने शव को अस्पताल में रखकर जमकर हो हंगामा किया। हंगामा के बाद अस्पताल के सभी कर्मी अस्पताल छोड़कर भाग निकले। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच कर आक्रोशित परिजनों को शांत करवाने का प्रयास किया, परंतु परिजनों का कहना था कि जब तक चिकित्सक व अस्पताल कर्मी यहां नहीं पहुंचेंगे तब तक शव को यहां से उठने नहीं दिया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार मृतका सुपौल जिला के बसंतपुर प्रखंड अंतर्गत 26 वर्षीय आरती कुमारी पति राहुल कुमार दिनबंदी गांव वार्ड 13 निवासी बताई जा रही है।
घटना के संदर्भ में मृतका के पिता तिलानंद पासवान ने बताया कि उसकी पुत्री आरती प्रसव को लेकर मायके ठूठी चैनपुर वार्ड संख्या तीन आई हुई थी, शनिवार को प्रसव पीड़ा होने के बाद उसे नरपतगंज लाया गया, जहां कुछ अस्पताल के दलालों ने उन लोगों को बहला फुसला कर अस्पताल चौक स्थित निजी अस्पताल मां हेल्थ केयर में जाकर भरोसा दिलाया कि 40 हजार रुपये में सुरक्षित आपरेशन कर दिया जाएगा। लेकिन आपरेशन के बाद में बच्चा मृत हुआ। करीब एक घंटे के बाद उसकी पुत्री की भी मौत हो गई। सभी आक्रोशित परिजनों का आरोप था कि झोलाछाप डाक्टर के कारण लापरवाही बरतने के कारण यह घटना घटी है। सभी अस्पताल में शव को रखकर उग्र प्रदर्शन किया।
पुलिस करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अररिया भिजवाए। मामले को लेकर चिकित्सा प्रभारी नरपतगंज के निजी अस्पताल में झोलाछाप डाक्टरों द्वारा प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा की मौत के आरोप मामलेे में नरपतगंज चिकित्सा प्रभारी डा. ओपी मंडल ने कहा कि पूर्व में भी इस क्लिनिक पर छापा मारकर सील किया गया था। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई किया जाएगा। वहीं नरपतगंज थानाध्यक्ष कुमार विकास ने बताया कि प्राइवेट क्लीनिक में महिला की मौत के बाद शव को कब्जा में लेते हुए जांच पड़ताल करते हुए आरोपित चिकित्सक पर कार्रवाई की जाएगी।
बताते चलें कि नरपतगंज प्रखंड मुख्यालय के समीप दर्जन भर अवैध रूप से क्लीनिक एवं नर्सिंग होम तथा अल्ट्रासाउंड चल रहा है, लगातार कई बार पदाधिकारी के द्वारा छापेमारी भी की गई लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके कारण संचालकों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। वहीं घटना के बाद नाम नहीं छापने के शर्त पर सरकारी अस्पताल के कर्मी बताते हैं कि जांच के नाम पर खानापूर्ति कर निजी अस्पताल के चिकित्सकों से मोटी रकम लेकर मामले को ठंडा बस्ता में बंद कर दिया जाता है और बिना डर भय के निजी अस्पताल धड़ले से चल रहा है। कुछ लोग यह भी बताया कि निजी अस्पताल पर प्रतिबंध नहीं लगाने का मुख्य कारण यह भी है कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी निजी क्लीनिक प्रखंड मुख्यालय में चला रहे हैं। सरकार और विभागीय वरीय पदाधिकारी को इसकी जांच अलग एजेंसी से कराना चाहिए तब जाकर गरीब मरीजों को सरकारी लाभ मिल सकता है।
