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भारत का निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार की मिलीभगत : राकेश कपूर

पटना(न्यूज क्राइम 24): कर्नाटक में चुनाव प्रचार समाप्त हुआ और 10 मई को मतदान व 14 मई को परिणाम आयेगा। चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप को लेकर भारत के निर्वाचन आयोग के पास राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी भाषणों को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने कई शिकायतें दर्ज कराई है। जहां निर्वाचन आयोग ने भाजपा के शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कांग्रेस पार्टी को नोटिस तक जारी कर दिया वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की शिकायत की अनदेखी कर दी गई।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले आम चुनाव में राहुल गाँधी के द्वारा दिए गए भाषण के चलते उनकी लोक सभा सदस्यता तक खत्म कर दी गई अब गिरफ्तारी की तैयारी है। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 2019 के आम चुनाव में पुलवामा के हमले में वीर शहीदों व सेना के नाम पर राष्ट्रीय भावना को गलत तरीकों से जागृत कर चुनाव में जीत हासिल की।

चुनाव आयोग अभी सोया हुआ है जब कर्नाटक विधान सभा चुनाव के दौरान अपने चुनावी भाषणों प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी धर्म के आधार पर ‘बजरंगबली की जय’ के नारों के साथ भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं। यह कानूनन गलत है।

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इसकी शिकायत के बावजूद भारत निर्वाचन आयोग उन पर संज्ञान लेकर कारवाई नहीं करता है। यह साबित करता है कि सरकार की सभी संस्थानों की तरह निर्वाचन आयोग भी सरकार व भारतीय जनता पार्टी दबाव में काम करती है।
इसीलिए आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति सरकार अपने पसंद की करती आ रही है। वैसे इस प्रकार की नियुक्तियों के लेकर हाल हीं उच्चतम न्यायालय ने भारत सरकार को कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किया है।

चलते चलते- चुनाव प्रचार समय सीमा समाप्त होने के बाद रात में करीब 12. 30 बजे प्रधानमंत्री द्वारा एक वीडियो जारी कर वोट देने की अपील की गई है। क्या चुनाव आयोग इस पर कार्रवाई करेगा?

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