बिहार

नीलामी के इंतजार में भरगामा थाना परिसर में सड़ रहे लाखों रुपए के जब्त वाहन

अररिया, रंजीत ठाकुर भरगामा थाना परिसर में सैकड़ो की संख्या में जब्त मोटरसाइकिल व अन्य वाहन कई वर्षों से नीलामी नहीं होने के कारण कबाड़ी बनने के कगार पर पहुंच गया है। इन वाहनों पर अब घास तक उग गया है। जब्त वाहनों की स्थिति ऐसी है कि उन्हें एक जगह से दूसरी जगह करने में परेशानी होती है। कई वाहन तो पूरी तरह से कबार बन चुके हैं। गौरतलब है कि जब्त वाहनों को एक निश्चित समय सीमा के बाद नीलामी करने का प्रावधान है,लेकिन कई वर्षों से भरगामा थाने की जब्त वाहनों की नीलामी नहीं होने के कारण ये कबार में तब्दील हो गया है। जानकारों का कहना है कि थाना में जब्त वाहनों को वाहन मालिक इसलिए नहीं छुड़ाते हैं कि उसे छुड़ाने एवं इंश्योरेंस परिवहन टैक्स आदि में जितना खर्च आएगा उतने में दूसरी नई गाड़ी आ जाएगी,इसलिए वाहन मालिक भी ऐसे वाहनों को छोड़ देते हैं।

भरगामा थाने में लगे कुछ ऐसे भी गाड़ी हैं जो 20 से 25 वर्षों से थाना परिसर में पड़ी हुई है इसके चलते वाहनों के इर्द-गिर्द बड़े-बड़े पेड़ पौधे उग गए हैं अब इन वाहनों की कीमत ना के बराबर हो चुकी है। जब्त किए गए किसी वाहन के पहिए तो किसी वाहन की बैटरी गायब हो गया है। इधर सामाजिक कार्यकर्त्ता रमेश भारती का कहना है कि विभागीय स्तर पर थाने में वाहन को रखने के लिए शेड व भवन की व्यवस्था होनी चाहिए थी,लेकिन भरगामा थाना में जब्त वाहन को रखने के लिए एक भी शेड या भवन नहीं है।

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लिहाजा खुले आसमान के नीचे यत्र-तत्र पड़े इन वाहनों का अब अस्तित्व हीं समाप्त होने के कगार पर है। उन्होंने कहा कि थाने में रखा वाहन विभाग के लिए हीं नहीं पुलिस कर्मियों के लिए भी सिर दर्द बन गया है। उन्होंने कहा कि भरगामा थाने में अक्सर देखा जाता है कि मालखाना की जवाबदेही लेने से अधिकांश अधिकारी कतराते हैं। वजह साफ है कि थाने की मालखाना की स्थिति काफी दयनीय है। वहीं इस मामले में थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि समयअनुसार वाहनों की नीलामी का आदेश मिलने पर नीलामी की कानूनी प्रक्रिया के तहत वाहन को रिलीज की जाती है,फिलहाल कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

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