बिहार

संस्थागत प्रसव में आई गिरावट को करें दूर, सिजेरियन प्रसव की संख्या बढ़ाने पर जोर

अररिया, रंजीत ठाकुर : जिलाधिकारी अनिल कुमार की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गयी। समाहरणालय स्थित परमान सभागार आयोजित बैठक में एएनसी जांच, संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण व प्रस्तावित स्वास्थ्य योजनाओं के प्रगति संबंधी मामलों की गहन समीक्षा की गयी। जिलाधिकारी ने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर अधिकारियों को कई जरूरी दिशा-निर्देश दिये। बैठक में सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप, डीआईओ डॉ मोईज, डीवीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह, एनसीडीओ डॉ राजेंद्र प्रसाद, डीपीएम संतोष कुमार, डीपीएनई पंकज कुमार सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारी, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सहयोगी संस्था के प्रतिनिधि सहित अन्य मौजूद थे।

संस्थागत प्रसव में आई गिरावट को तुरंत करें दूर

समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि बीते जून माह में 7186 गर्भवती महिलाओं का चतुर्थ एएनसी जांच हुआ। इसके मुकाबले संस्थागत रूप में 3164 प्रसव मामलों का ही निष्पादन हो सका। इस 04 हजार के अंतर को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने अधिक अंतर वाले फारबिसगंज, पलासी, रानीगंज, जोकीहाट प्रखंड में विशेष टीम गठित कर इसके कारणों की जांच व समाधान के उपाय तलाशने के लिये निर्देशित किया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सिजेरियन प्रसव की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। फारबिसगंज अनुमंडली अस्पताल में तीन सर्जन के बावजूद सिजेरियन प्रसव की संख्या कम होने पर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। रात्रि कालीन सिजेरियन प्रसव की संख्या बढ़ाने पर उन्होंने विशेष जोर दिया।

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जरूरतमंद बच्चों तक हर हाल में पहुंचायें एसएनसीयू की सुविधा

समीक्षा के क्रम में जिले के तीन एपीएचसी को एल-01 सेंटर के रूप में विकसित करने के निर्देश के आलोक में अब तक दो सेंटर पर एल-01 की सुविधा बहाल होने की बातें सामने आई। जिलाधिकारी ने जल्द से जल्द शेष अन्य सेंटर पर भी सुविधा बहाल करने के लिये निर्देशित किया। भव्या एप पर डॉक्टर कंसल्टेशन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ जिलाधिकारी ने एसएनसीयू की सेवाएं अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने के लिये निर्देशित किया। केंद्र में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिये सभी संस्थानों से रेफर बच्चों व भर्ती बच्चों का डाटा बेस तैयार कर इसकी नियमित समीक्षा का निर्देश जिलाधिकारी ने दिया। वहीं टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने के लिये मरीजों के नोटिफिकेशन में तेजी लाने, साथ ही निक्षय मित्रों की संख्या बढ़ाकर जन सहभागिता को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग सहित अन्य सरकारी कर्मियों को प्रेरित कर निक्षय मित्र बनाने पर विशेष जोर दिया। इसी तरह स्वास्थ्य संस्थानों में पीपीपी मोड में अल्ट्रासाउंड व इसीजी की सेवा बहाली की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये अधिकारियों को निर्देशित किया।

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