पूर्णिया, (न्यूज़ क्राइम 24) फाइलेरिया (हाथीपांव) उन्मूलन के उद्देश्य से जन समुदाय को जागरूक करने तथा जिला स्तरीय रणनीतियों को सुदृढ़ करने हेतु बुधवार को होटल सेंटर पॉइंट पूर्णिया में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समुदाय एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, एम्स पटना के तत्वावधान में विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय पांडेय के मार्गदर्शन में, जिला स्वास्थ्य समिति (DHS), पूर्णिया एवं विमेन्स कलेक्टिव फोरम के सहयोग से किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन सिविल सर्जन पूर्णिया डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (DVBDCO) डॉ आर पी मंडल एवं अन्य अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर एम्स पटना के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. दीपिका अग्रवाल, डॉ. वेंकटेश, डॉ. आनंद साथ ही भीडीसीओ रवि नंदन सिंह, डीभीबीएस सोनिया मंडल, डब्लूएचओ जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ दिलीप कुमार सभी प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीसीएम, भीबीडीएस, आशा कार्यकर्ता, सीएचओ, पिरामल स्वास्थ्य, सीफार, आईसीडीएस एवं जीविका प्रतिनिधि सहित कई अन्य हितधारक उपस्थित थे, जिन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य—2027—की दिशा में सामूहिक प्रयासों की प्रतिबद्धता दोहराई।
फाइलेरिया की व्यापकता, इसकी रोकथाम एवं समुदाय-आधारित रणनीतियों की आवश्यकता पर डाला गया प्रकाश :
प्रशिक्षण में एम्स पटना के सह प्राध्यापक डॉ संतोष कुमार निराला ने दिया, जिन्होंने फाइलेरिया की व्यापकता, इसकी रोकथाम एवं समुदाय-आधारित रणनीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डॉ. निराला ने तकनीकी सत्र में फाइलेरिया के प्रसार, सामुदायिक बाधाओं तथा उन्मूलन रणनीतियों पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं जिला भेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. आर पी मंडल ने जिला स्तर पर चल रही गतिविधियों और चुनौतियों को साझा किया। कार्यशाला के दौरान यह रेखांकित किया गया कि सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान के दौरान कई लोग आशा कर्मियों द्वारा दी जाने वाली दवा खाने से इनकार करते हैं, जो उन्हें बीमारी के करीब ले जाता है और इसके शारीरिक व आर्थिक दुष्परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
लोगों द्वारा फाइलेरिया संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए एमडीए अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उपलब्ध कराई जा रहे दवा का शत प्रतिशत सेवन करते हुए लोग फाइलेरिया ग्रसित होने से सुरक्षित हो सकते हैं और सामान्य जीवन का लाभ उठा सकते हैं। कार्यशाला में सभी प्रखंड अधिकारियों को लोगों द्वारा फाइलेरिया ग्रसित होने पर होने वाले समस्याओं की विस्तृत जानकारी फाइलेरिया ग्रसित मरीज के रूप में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई गई। प्रशिक्षण में सभी अधिकारियों को के. नगर प्रखंड के छः स्टेज तक फाइलेरिया ग्रसित हो चुके मरीज छोटू पासवान के स्थिति की जानकारी दी गई।
अधिकारियों को फाइलेरिया ग्रसित मरीज छोटू पासवान द्वारा बताया गया कि दोनों पैर पूरी तरह ग्रसित होने से सामान्य काम में बहुत समस्या होती है। कभी कभी एक्यूट अटैक होने पर बहुत दर्द और पैर के चमड़ों से सफेद पानी भी निकलता है। फिर स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से क्षेत्र में सभी फाइलेरिया ग्रसित मरीजों की एक ग्रुप बनाते हुए सभी को फाइलेरिया ग्रसित अंगों की देखभाल, दवाई सेवन और एक्सरसाइज करने की जानकारी दी गई है जिससे उन्हें बहुत लाभ मिल रहा है। अब एक्यूट अटैक कम हो गए हैं जिससे मैं अपने घर का सामान्य काम भी आसानी से कर सकता हूँ। फाइलेरिया हो चुके लोगों को भी इसका लाभ उठाते हुए ग्रसित अंग को एक्सरसाइज करते हुए नियंत्रण रखना चाहिए।
फाइलेरिया उन्मूलन से संबंधित बाधाओं, प्रबंधन रणनीतियों और अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई :
आयोजित पैनल चर्चा का संचालन डॉ. शिबाजी देबबर्मा (सहायक प्रोफेसर, सीएफएम, एम्स पटना) ने किया, जिसमें आईसीडीएस प्रतिनिधि, जीविका स्वास्थ्य एवं पोषण प्रबंधक, विभिन्न ब्लॉकों के चिकित्सा पदाधिकारी, डब्लूएचओ एनटीडी जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. दिलीप कुमार, सैन्य एनसीसी के प्रतिनिधि, पिरामल फाउंडेशन के प्रोग्राम लीड श्री रणविजय तथा जीएमसीएच पूर्णिया के कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार सहित कई हितधारकों ने भाग लिया। पैनल में फाइलेरिया उन्मूलन से संबंधित बाधाओं, प्रबंधन रणनीतियों और अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। जीएमसीएच पूर्णिया के सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ अभय कुमार ने भी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और जिले में चल रहे फाइलेरिया उन्मूलन प्रयासों पर अपने महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। कार्यशाला के दौरान एक फाइलेरिया रोगी ने अपने रोग अनुभव, पहचान और इलाज से जुड़ी चुनौतियों को साझा किया, वहीं सभी प्रखंड के बीसीएम ने फील्ड लेवल पर आने वाली कठिनाइयों और प्रगति से जुड़ी बातें सामने रखीं।
