बिहार

मदरसा छात्रों को ‘बाल तस्करी’ के नाम पर परेशान न किया जाए : मिल्लत परिषद

फुलवारीशरीफ, अजीत। ऑल इंडिया मिल्लत परिषद बिहार ने मदरसा छात्रों को रेलवे स्टेशनों पर “बाल तस्करी” के संदेह में रोके जाने और परेशान किए जाने पर गहरी चिंता जताई है. परिषद ने इस संबंध में बिहार के मुख्यमंत्री, डीजीपी, जीआरपी और आरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है.

परिषद के अध्यक्ष हज़रत मौलाना डॉ. मोहम्मद आलम क़ासमी ने एक प्रेस बयान में कहा कि रमज़ान के पवित्र महीने के बाद देशभर के मदरसे खुल चुके हैं और बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए विभिन्न राज्यों की यात्रा कर रहे हैं. विशेष रूप से बिहार के छात्र उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों के मदरसों में पढ़ने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि इन छात्रों को रेलवे स्टेशनों पर “बाल तस्करी” के शक में ट्रेन से उतार लिया जाता है. इससे छात्रों और उनके साथ यात्रा कर रहे शिक्षकों को अनावश्यक मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. कई मामलों में शिक्षकों पर निराधार आरोप लगाए जाते हैं और कुछ घटनाओं में उन्हें जेल तक भेज दिया जाता है।

मौलाना क़ासमी ने कहा कि पिछले वर्ष दानापुर और मुगलसराय सहित कई स्टेशनों पर इस तरह की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई और उनके मन में भय का माहौल पैदा हुआ. उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील मुद्दा बताते हुए प्रशासन से संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। परिषद ने अभिभावकों को भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. कहा गया है कि छोटे बच्चों को दूर-दराज के राज्यों में भेजने से पहले पूरी तैयारी और सावधानी बरतें. यदि संभव हो तो स्थानीय स्तर या बिहार के ही अन्य जिलों के मदरसों में बच्चों को शिक्षा दिलाना प्राथमिकता दें, जहां बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। यदि बच्चों को दूसरे राज्यों में भेजना जरूरी हो, तो माता-पिता स्वयं उन्हें छोड़ने जाएं. अगर शिक्षक के साथ भेजना पड़े, तो बच्चों के पास वैध टिकट, पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेज जरूर हों. साथ ही अभिभावकों की लिखित अनुमति भी दी जाए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न हो।

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मौलाना क़ासमी ने यह भी सुझाव दिया कि एक व्यक्ति के साथ अत्यधिक संख्या में बच्चों को भेजने से बचा जाए और कुछ अभिभावकों को भी साथ रखा जाए. यात्रा से पहले स्थानीय मुखिया, सरपंच या पार्षद को सूचना देकर सत्यापन कराना भी उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को उस मदरसे का पूरा पता, संपर्क नंबर और अन्य जानकारी अपने पास रखनी चाहिए तथा बच्चों को भी यह जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि पूछताछ के दौरान वे सही उत्तर दे सकें. जानकारी के अभाव में अक्सर संदेह की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

अपने पत्र में मौलाना क़ासमी ने सरकार से मांग की है कि रेलवे पुलिस और संबंधित एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि मदरसा छात्रों और उनके शिक्षकों को बिना ठोस कारण के परेशान न किया जाए. साथ ही बाल कल्याण से जुड़े अधिकारियों को भी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का निर्देश दिया जाए। परिषद ने कहा कि अधिकतर छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और मदरसों में उन्हें मुफ्त शिक्षा, आवास, भोजन, वस्त्र और चिकित्सा जैसी सुविधाएं मिलती हैं. ऐसे में उनके साथ होने वाली किसी भी प्रकार की अनावश्यक कार्रवाई उनके भविष्य और शिक्षा दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। अंत में परिषद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके नाम पर निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को परेशान करना उचित नहीं है. प्रशासन को इस दिशा में संतुलित, संवेदनशील और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है।

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