पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) उद्योग विभाग, बिहार द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के 12 परिक्ष्यमान पदाधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान उद्योग विभाग के सचिव, बिहार फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) तथा बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) के प्रबंध निदेशक (MD), श्री कुंदन कुमार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को विभाग की कार्यप्रणाली, दायित्वों एवं विभिन्न प्रशासनिक आयामों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रभावी, पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासन के महत्व पर बल दिया तथा जन-केंद्रित एवं परिणामोन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का मार्गदर्शन किया। प्रशिक्षण सत्र में विभाग की संरचना, इसके अंतर्गत संचालित निदेशालयों एवं क्षेत्रीय कार्यालयों की कार्यप्रणाली, विभिन्न शाखाओं के दायित्व एवं कार्य वितरण से संबंधित जानकारी दी गई। साथ ही विभागीय योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन, क्रियान्वयन तंत्र, ऑडिट एवं लेखा प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर उद्योग विभाग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि विभाग राज्य में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने, उद्योग स्थापना को सुगम बनाने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने तथा निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रशिक्षु अधिकारियों को राज्य में विकसित की जा रही प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं—इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC), विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) एवं विभिन्न औद्योगिक पार्कों की जानकारी दी गई। इन पहलों के माध्यम से बिहार को विनिर्माण, निर्यात एवं निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन नीतियों, जैसे बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति, बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी तथा सेक्टर-विशिष्ट नीतियों (टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, आईटी/ईएसडीएम आदि) के बारे में भी जानकारी दी गई, जिनके माध्यम से उद्योगों को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न सुविधाएं एवं प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों को विभाग के प्रमुख अंगों—बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA), इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA), UMSAS तथा बिहार फाउंडेशन—की कार्यप्रणाली एवं योगदान से भी अवगत कराया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम परिक्ष्यमान पदाधिकारियों को औद्योगिक विकास से जुड़े नीतिगत एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं की व्यापक समझ प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुआ, जिससे वे अपने दायित्वों का प्रभावी एवं सुचारू रूप से निर्वहन कर सकें।
