बिहार

आरोग्य दिवस की मदद से स्वास्थ्य व पोषण संबंधी मामलों में सुधार संभव

अररिया, रंजीत ठाकुर। आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह आरोग्य दिवस का आयोजन किया जाता है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से आरोग्य दिवस के सफल आयोजन को महत्वपूर्ण माना जाता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित होने वाले आरोग्य दिवस पर योग्य दंपती, गर्भवती व धात्री महिलाएं, क्षेत्र की किशोरी व शून्य से 5 वर्ष आयु तक के बच्चों को लक्षित लाभार्थी को चिह्नित करते हुए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है।

आरोग्य दिवस का आयोजन नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने, एएनसी जांच, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। वहीं परिवार नियोजन संबंधी विभिन्न स्थायी व अस्थायी साधनों के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए समुदाय स्तर पर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य व स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आरोग्य दिवस के सफल आयोजन को महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का जरिया है आरोग्य दिवस:

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सिविल सर्जन डॉ विधानचंद्र सिंह ने बताया कि आरोग्य दिवस एक महत्वपूर्ण मंच है। स्वास्थ्य विभाग व आईसीडीएस के सहयोग से टीकाकरण के आच्छादन मामलों में अपेक्षित सुधार हुआ है। आरोग्य दिवस को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिये एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संबंधित क्षेत्र की जीविका, गांव के व्यस्क व बुजुर्गों के साथ साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बेहतर आपसी समन्वय का होना जरूरी है। एक दूसरे के सहभागी बनकर सेवा भाव व लगन से किये गए सामूहिक प्रयास से व आरोग्य दिवस के माध्यम से स्वास्थ्य व पोषण संबंधी कई महत्वपूर्ण आयाम आसानी से हासिल की जा सकती है।

आरोग्य दिवस से मातृ शिशु संबंधी स्वास्थ्य में सुधार संभव-

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि मिशन मानव विकास के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की मदद से मातृ व शिशु मृत्यु दर के मामलों में काफी कमी आई है। अभी इसे और बेहतर बनाने में आरोग्य दिवस महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। आरोग्य दिवस पर केंद्र पहुंचने वाली महिला व पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण आसान हो जाता है। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा योग्य दंपतियों को प्रसव के बाद परिवार नियोजन के लिये उपलब्ध विभिन्न स्थायी व अस्थायी साधनों की जानकारी देते हुए उन्हें इसके लिये प्रेरित जाता है। धात्री महिलाओं को भी दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाता है।

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