बिहार

हिंदी राष्ट्रीय अस्मिता एकता और अखंडता का प्रतिक है : शशि भूषण

वैशाली, (न्यूज़ क्राइम 24) जिला मुख्यालय हाजीपुर मेदनीमल में वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस पखवाड़ा का आयोजन किया गया। इस समारोह का उदघाटन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बैंक ऑफ बड़ौदा हाजीपुर के मुख्य प्रबंधक मनीष कुमार, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बैंक ऑफ बड़ौदा हाजीपुर के संयुक्त प्रबंधक विजय कुमार, वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ शशि भूषण कुमार, प्रधानमंत्री डॉ अरुण कुमार निराला, वरिष्ठ साहित्यकार रविंद्र कुमार रतन एवं कवयित्री डॉ केकी कृष्णा ने फीता काटकर किया।

समारोह के प्रथम सत्र में उदघाटन समारोह और द्वितीय सत्र में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए वैशाली जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और टैगोर किड्स एंड हाई स्कूल के निदेशक वरिष्ठ पत्रकार डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, एकता और अखंडता का प्रतिक है।भाषा मानवीय जीवन की एक महत्वपूर्ण इकाई होती है,जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भावों और विचारों को अभिव्यक्त करता है। राजभाषा के रूप में भाषा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि यह सरकार और जनता के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

भारत में संपर्क भाषा के रूप में हिंदी सदियों से अपनाई जा रही है,क्योंकि यह सर्वाधिक लोगों द्वारा बोली और समझी जाती है। बैंक ऑफ़ बड़ौदा हाजीपुर के मुख्य प्रबंधक श्री मनीष कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी लिपि का मूल अर्थात प्राचीन रूप अशोक के शिलालेखों के लिपि से मिलता है,जो विक्रम संवत् से लगभग दो सौ वर्ष पूर्व का है और गुजरात के काठियावाड़ से उड़ीसा तक और नेपाल की तराई से मैसूर तक अनेक स्थानों से मिला है। डॉ अरुण कुमार निराला ने कहा कि 14 सितंबर,1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसलिए 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है।

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प्रथम हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। अनुच्छेद 343(1) में कहा गया है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, किंतु देवनागरी लिपि में संख्याएं नहीं लिखी जाएगी। विजय कुमार ने कहा कि आधुनिक नागरी लिपि के विकास का अनुकूल युग 15-16वीं शताब्दी माना जाता है। डॉ केकी कृष्णा ने कहा कि देवनागरी लिपि में अक्षरों की संख्या अधिक है। इसकी वर्णमाला में 52 अक्षर है।आधुनिक समय में हिंदी भाषा साहित्य के जनक भारतेंदु हरिश्चन्द्र माने जाते है। इन्होंने हिंदी भाषा को एक नई ऊंचाई प्रदान किया है।विद्यालय की प्राचार्या पिंकी कुमारी ने कहा कि हिंदी बोलने में शर्म का अनुभव नहीं करना चाहिए, बल्कि गर्व का अनुभव होना चाहिए। हिंदी का अपमान अपनी माँ का अपमान है। साथ ही हमें अन्य भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी सीखने पर भी बल देना चाहिए। साहित्यकार रविंद्र कुमार ने कहा हमें आर्थिक तरक्की के लिए भाषा संबंधी संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर अपने ज्ञान के दायरे को बढ़ाना होगा।

समारोह में निम्न कुल 7 साहित्यकारों को नामित स्मृति सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया। जनकवि चंदेश्वर राम चंदे स्मृति सम्मान- 2025 श्री अमित कुमार को दिया गया। डॉ बिजली प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान -2025 श्री रविंद्र कुमार रतन को दिया गया।मनमोहन स्मृति सम्मान -2025 श्री रविंद्र सिंह को दिया गया।सूर्य कुमार शास्त्री स्मृति सम्मान- 2025 श्री शम्भू शरण मिश्र को दिया गया।कपिल छवि स्मृति सम्मान -2025 श्री त्रिवेणी कुमार को दिया गया।बाल कवि राज नारायण चौधरी स्मृति सम्मान -2025 श्रीमति रूबी कुमारी को दिया गया। प्रोफेसर बिंदेश्वरी प्रसाद सिह स्मृति सम्मान -2025 डॉ केकी कृष्णा को दिया गया। इस स्थान ही बैक के अधिकारी मनीष कुमार और विजय कुमार को साहित्य सेवी सम्मान 2025 से सम्मनित किया गया। स्कूल के बच्चों ने भी काव्य पाठ में शामिल हुआ जिसमें सबसे अच्छा काव्य पाठ करनेवाले 5 बच्चों को मेडल दे कर पुरिस्कृत किया गया।मंच संचालन कुंदन कृष्णा और धन्यवाद ज्ञापन स्कूल प्राचार्या पिंकी कुमारी ने किया। वही सुष्मिता वर्मा, रौशनी कुमारी,सुप्रिया कुमारी,नेहा कुमारी, लुबाना नवाज़, शाक्षी कुमारी, रेनू शर्मा, शबनम खाणम एवं विवेक रंजन उपस्थित थे।

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