पटना, अजीत। पवित्र रमज़ान के मुक़द्दस महीने में फुलवारी शरीफ के एक नन्हे बच्चे ने अपनी मासूमियत और जज़्बे से सबका दिल जीत लिया. चार वर्षीय राहिल अकरम कादरी ने अपना पहला रोज़ा रखकर परिवार को गर्व और खुशी का खास मौका दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फ़ज़ाइल हुसैन कादरी के छोटे पोते राहिल अकरम कादरी ने मात्र चार वर्ष की आयु में रोज़ा रखने का संकल्प लिया. राहिल के पिता नासिर हुसैन कादरी ने बताया कि रमज़ान के पहले दिन से ही राहिल रोज़ा रखने की ज़िद कर रहे थे. परिवार ने पहले उनकी कम उम्र को देखते हुए समझाने की कोशिश की, लेकिन उनके उत्साह और लगन को देखते हुए उन्हें रोज़ा रखने की अनुमति दी गई. आश्चर्यजनक रूप से राहिल ने पूरे दिन का रोज़ा सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अवसर पर घर में उत्सव जैसा माहौल रहा. उनके नाना सब्तीन अशरफ़ी ने राहिल को ढेरों दुआएँ दीं और उज्ज्वल भविष्य की कामना की. परिवार के अन्य सदस्य फूफा, फूफी, चाचा और चाची सहित सभी परिजनों ने नन्हे रोज़ेदार को मुबारकबाद दी और उसके हौसले की सराहना की। बाद में राहिल अकरम कादरी ने अपनी नानी के घर पूरे परिवार के साथ मिलकर इफ़्तार किया. इफ़्तार के दौरान विशेष पकवान बनाए गए और नन्हे रोज़ेदार को उपहार भी दिए गए. परिवार के लोगों ने कहा कि इतनी कम उम्र में रोज़ा रखना राहिल की धार्मिक परवरिश और परिवार के संस्कारों को दर्शाता है। रमज़ान के इस पवित्र अवसर पर राहिल का पहला रोज़ा परिवार के लिए यादगार बन गया और पूरे मोहल्ले में इसकी चर्चा रही।
