बिहार

पोषण पुर्नवास केंद्र के सफल संचालन सुनिश्चित करायें- स्वास्थ्य अधिकारी

अररिया, रंजीत ठाकुर। कुपोषण जिले की गंभीर समस्याओं में से एक है। आंकड़े बताते हैं कि जिले में 06 से 23 माह तक के महज 12.08 फीसदी बच्चों को ही पर्याप्त पोषाहार मिल पाता है। कुपोषण संबंधी मामलों को नियंत्रित करने के लिये जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। कुपोषण संबंधी मामलों में कमी लाने में सदर अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुर्नवास केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन पोषण पुर्नवास केंद्र में इलाज के लिये बच्चों का दाखिला अपेक्षा अनुरूप नहीं हो रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन विधानचंद्र सिंह ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये हैं। जारी निर्देश के मुताबिक हर सप्ताह सभी प्रखंडों से कुपोषित तीन बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुर्नवासा केंद्र में दाखिल कराने के लिये कहा गया। जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित मामले की साप्ताहिक समीक्षा की जायेगी।

इसमें किसी तरह की लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। एनआरसी में कुपोषित बच्चों के इलाज से जुड़ी सभी सुविधा उपलब्ध संबंधित मामले में जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम संतोष कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल परिसर में 20 बेड क्षमता वाला पोषण पुर्नवास केंद्र संचालित है। जहां कुपोषित बच्चों के सुमचित इलाज से जुड़ी सभी तरह की जरूरी सुविधाएं उपलब्ब्ध हैं। लेकिन केंद्र में कुपोषित बच्चों का दाखिला अपेक्षा अनुरूप नहीं हो पा रहा है। जो चिंताजनक है। इसमें सुधार को लेकर सिविल सर्जन द्वारा संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिये गये हैं। ताकि पोषण पुर्नवास केंद्र का सफल संचालन सुनिश्चित कराते हुए जिले में कुपोषण संबंधी मामलों को नियंत्रित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सके।

अभिभावक के रहने-खाने की सुविधा के साथ दी जाती श्रम क्षतिपूर्ति की राशि

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केंद्र में दाखिल बच्चे के एक अभिभावक के लिये केंद्र में रहने व खाने पीने की सुविधा के साथ उन्हें श्रम क्षतिपूर्ति की राशि के रूप में 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। वहीं आशा द्वारा कुपोषित बच्चों को केंद्र में दाखिल कराने पर उन्हें इंसेंटिव के रूप में 250 रुपये का भुगतान किया जाता है। इतना ही नहीं उन्हें रोजमर्रा उपयोग की चीजें जैसे साबुन, तेल सर्फ सहित अन्य सामग्री भी नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

कुपोषित बच्चों के इलाज में एनआरसी की भूमिका महत्वपूर्ण

सिविल सर्जन ने कहा कि कुपोषित बच्चों के इलाज के लिहाज से पोषण पुर्नवास केंद्र का संचालन महत्वपूर्ण है। पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने के बाद बच्चों के भूख की परीक्षण होती है। इसके आधार पर बच्चों के डाइट का निर्धारण होता है। निर्धारित प्रक्रिया व तय मानकों के आधार पर बच्चों के लिये विशेष डाइट तैयार किया जाता है। इसे एफ-75 व एफ-100 के नाम से जाना जाता है। जो एक फार्मूला मिल्क होता है। इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व व निर्धारित मात्रा में कैलोरी मौजूद होता है। जरूरी पोषाहार, उचित सलाह व परामर्श से बच्चों के सेहत में तेजी से सुधार संभव होता है।

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