पटना, अजित। दलित-गरीबों के घरों पर चल रही बुलडोजर कार्रवाई, मनरेगा कानून को कमजोर करने और चार श्रम कानून लागू करने के विरोध में अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा और भाकपा माले की ओर से सोमवार को पटना के संपतचक और फुलवारी शरीफ प्रखंड में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया. सैकड़ों मजदूर, महिलाएं और ग्रामीण गरीब इस आंदोलन में शामिल हुए। फुलवारी शरीफ प्रखंड कार्यालय पर आयोजित प्रदर्शन की अध्यक्षता कामरेड शरीफा मांझी ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के प्रखंड सचिव अनिल कुमार चंद्रवंशी ने किया. प्रदर्शन में देवी लाल पासवान, साधु शरण प्रसाद, ललीन पासवान, संजय ठाकुर, कामेश्वर पंडित, सोनी देवी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए फुलवारी के पूर्व विधायक कामरेड गोपाल रविदास ने कहा कि एनडीए सरकार गरीबों के वोट से बनी है, लेकिन सत्ता में आते ही गरीबों के खिलाफ बुलडोजर चलाने लगी है. उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे गरीबों के अधिकार वाले कानून का नाम बदलकर ‘ग्रामजी’ करना मजदूर विरोधी कदम है. चार श्रम कानून मजदूरों से 8 घंटे काम का अधिकार छीनकर 12 घंटे काम थोप रहे हैं, जबकि मजदूरी 8 घंटे की ही दी जाएगी।
भाकपा माले के प्रखंड सचिव गुरुदेव दास ने कहा कि हड़ताल करने से पहले 30 दिन का नोटिस देने की शर्त लगाकर मजदूरों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों की जमीन छीनकर भूमि बैंक के माध्यम से पूंजीपतियों को सौंपना चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फुलवारी शरीफ में बुलडोजर चला, तो भाकपा माले उसे रोकने के लिए जनता के साथ सड़क पर उतरेगी।
वहीं संपतचक प्रखंड में अखिल भारतीय ग्रामीण खेत मजदूर सभा, मनरेगा मजदूरों और भाकपा माले प्रखंड कमेटी की ओर से संपतचक मध्य विद्यालय से विशाल जुलूस निकाला गया, जो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होते हुए अंचल कार्यालय और प्रखंड कार्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन में तब्दील हो गया.सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य सरोज चौबे ने कहा कि यह सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है और पूरे देश में इसके खिलाफ विरोध हो रहा है. उन्होंने कहा कि भाकपा माले सड़क पर लड़ने वाली पार्टी है और तानाशाही सरकार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड सचिव सत्यानंद कुमार ने कहा कि भीषण शीतलहर के बीच दलित-गरीबों की बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है
जो अमानवीय और गैरकानूनी है. उन्होंने मांग की कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी भी गरीब परिवार को न उजाड़ा जाए, पीपीएच एक्ट 1948 के तहत बसे लोगों को पर्चा-पट्टा दिया जाए, मनरेगा की पुनर्बहाली हो और चार श्रम कानून तत्काल वापस लिए जाएं। इस आंदोलन का नेतृत्व भाकपा माले केंद्रीय कमेटी सदस्य सरोज चौबे, प्रखंड सचिव सत्यानंद कुमार, पुकार जी, संदीप कुमार यादव, लक्ष्मी कुमार, सरोज दास, राजद नेता मनोज कुमार यादव, रासमनी देवी, सुरेश सिंह और सुरेशचंद्र ठाकुर ने किया। प्रदर्शनकारियों ने अंचल कार्यालय में मांगों से संबंधित स्मार पत्र सौंपा. कार्यालय के बड़े बाबू ने बताया कि यह मामला अंचलाधिकारी से संबंधित है, जिस पर 8 जनवरी 2026 को दिन के 12 बजे बातचीत तय की गई है. आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया गया और वहीं एक सभा आयोजित हुई।
