पटना, (न्यूज़ क्राइम 24) AIIMS पटना के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने पिछले पांच वर्षों में 700 से अधिक बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस दौरान 712 बच्चों की ऑर्थोपेडिक सर्जरी की गई। जन्मजात हाथ-पैर की विकृतियों, चोट, हड्डी के संक्रमण, हड्डी के ट्यूमर, हड्डी की अन्य बीमारियों और पैरों की लंबाई में अंतर जैसी जटिल समस्याओं का सफल इलाज किया गया। पहले जिन्हें इलाज के लिए राज्य के बाहर भेजना पड़ता था, अब उन्हें AIIMS पटना में ही आसानी से और नियमित रूप से उपचार मिल रहा है।
कई गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य राहत कोष जैसी सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया गया।
AIIMS पटना अब बिहार और पूर्वी भारत का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहाँ न केवल बिहार बल्कि पड़ोसी राज्यों और नेपाल के बच्चे भी इलाज के लिए आते हैं। विभाग ने कई बच्चों की चलने-फिरने की क्षमता बहाल की है और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार किया है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उद्देश्यों में एक अहम योगदान है।
इस अवसर पर AIIMS पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो.(ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि अतिरिक्त ऑपरेशन थिएटर, बेहतर संसाधन और पर्याप्त स्टाफ की वजह से बच्चों की सर्जरी का इंतजार अब काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि AIIMS पटना सभी बच्चों को उच्च गुणवत्ता, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) अनुप कुमार ने बताया कि सरकारी योजनाओं ने गरीब परिवारों के अस्पताल और सर्जरी खर्च को कवर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि संस्थान में पेडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सेवाओं का नेतृत्व डॉ रितेश अरविंद पांडेय करते हैं जबकि डॉ प्रभात अग्रवाल और डॉ अविनाश कुमार बच्चों में जटिल रीढ़ की हड्डी की विकृतियों का इलाज करते हैं। पेडियाट्रिक ट्रॉमा मामलों में प्रोफेसर (डॉ) अनुप कुमार, डॉ सुदीप कुमार और डॉ बालगोविंद राजा सहयोग करते हैं। वहीं बच्चों को सुरक्षित एनेस्थीसिया और ऑपरेशन के दौरान देखभाल प्रदान करने की जिम्मेदारी प्रोफेसर (डॉ) उमेश भदानी, एनेस्थीसियोलॉजी विभागाध्यक्ष संभालते हैं।
